वेतन रिकवरी के लिए भी लिखा गया पत्र
आठ अगस्त को विश्वविद्यालय की ओर से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त हुई जिसमें डेविड ल्यूक की ओर से प्रस्तुत की गई मार्कशीट का रोल नंबर उस सत्र में रजिस्टर्ड नहीं पाया गया यानी उनकी एमए की डिग्री कानपुर यूनिवर्सिटी ने प्रमाणित नहीं की है। इसी मामले में विशप मोरिस एडगर दान ने सिविल लाइंस थाना पुलिस को तहरीर देकर अब तक प्रिंसिपल के रूप में लिए गए करोड़ों रुपए वापस करने की मांग की है।
इसके साथ ही फर्जीवाड़े के लिए आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। इस मामले में राष्ट्रीय अभिभावक मोर्चा के संयोजक बीडी अग्रवाल ने भी शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में आइजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत के बाद सिविल लाइन थाने के सीनियर सब इंस्पेक्टर चंद्रभान सिंह ने भी मामले जांच की थी।
जांच कर उन्होंने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को अपनी रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक डेविड ल्यूक की डिग्री फर्जी और कूटरचित पाई गई है। पुलिस कमिश्नर को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि बॉयज हाई स्कूल के कार्यवाहक प्रिंसिपल बनकर कूटरचित दस्तावेज व फर्जी जालसाजी और कूट रचना द्वारा मार्कशीट बनाकर धोखा देने की बदनियती से भत्ते व वेतन का 3.25 करोड रुपए का भुगतान गबन करने का अपराध प्रमाणित होता है।
प्रिंसिपल और विशप के बीच खिंची तलवारें
विवेचक चंद्रभान सिंह की जांच रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रकरण अदालत में विचाराधीन नहीं है। वहीं इस मामले में प्रिंसिपल डेविड ल्यूक का पक्ष जानना चाहा तो स्कूल प्रबंधन ने उनके शहर से बाहर होने की जानकारी दी। हालांकि दूसरी ओर प्रिंसिपल की डिग्री पर सवाल उठाने वाले विशप मोरिस एडगर दान की बात करें तो उनका भी विवादों से पुराना नाता रहा है।
विशप मोरिस एडगर दान के खिलाफ वित्तीय अनियमितता के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में विशप मोरिस एडगर दान और बॉयस हाई स्कूल के प्रिंसिपल डेविड ल्यूक के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। प्रिंसिपल और विशप के बीच छिडी वर्चस्व की इस जंग में जहां सैकड़ों साल पुराने प्रतिष्ठित स्कूल की प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है। वहीं स्कूल में पढ़ने वाले आठ हजार से ज्यादा बच्चों के भविष्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।