स्वामी ब्रह्माश्रम ने बताया कि सोमवार को शुभ मुहूर्त में शाम चार बजे भूमि पूजन होगा। इसके बाद मंगलवार से रेती पर दंडी स्वामी नगर बसाने का काम शुरू हो जाएगा। हालांकि स्वामी ब्रह्माश्रम ने दो दिन पहले हरिश्चंद्र मार्ग पर छठवें पांटून पुल के निर्माण की मांग को लेकर मेला प्रशासन को चेताया था कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो वह दंडी स्वामी नगर बसाने पर पुनर्विचार करेंगे।
इसके अलावा एक और गाटा मार्ग आवंटित करने, दलदली भूमि को पाटकर देने का भी मुद्दा उन्होंने उठाया था, लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं हो सका है। भूमि आवंटन के बाद स्वामी ब्रह्माश्रम का कहना था कि छठवें पांटून पुल की बात मेला प्रशासन ने स्वीकार कर ली है। लेकिन, समय कम होने की वजह से इसका निर्माण अगले वर्ष से कराने का भरोसा दिलाया है। ऐसे में मेला बसाने का बहिष्कार वापस ले लिया गया।
भूमि आवंटन से पहले आचार्यवाड़ा के एक गुट ने की गंगा पूजा, दूसरे ने बनाई दूरी
भूमि आवंटन से पहले आचार्यवाड़ा के संतों में रविवार को मतभेद सामने आ गया। रामानुजनगर बसाने के लिए एक धड़े ने परंपरा से हटकर भूमि आवंटन से पांच दिन पहले ही गंगा पूजन कर दिया। जबकि, दूसरे धड़े ने इससे दूरी बनाए रखी। इस धड़े ने गंगा पूजन को मनमानी बताते हुए प्रशासन की ओर से निर्धारित तिथि पर भूमि आवंटन कराकर गंगा पूजन करने का एलान किया।
रामानुजनगर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामेश्वराचार्य, कोषाध्यक्ष घनश्यामाचार्य समेत कई संतों ने भूमि आवंटन से पहले ही मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन किया। बतौर मुख्य अतिथि परमहंस टीकरमाफी मठ के स्वामी हरिचैतन्य ब्रम्हचारी उपस्थित थे। स्वामी घनश्यामाचार्य का कहना था कि उनकी प्रबंध समिति को मेला प्रशासन की ओर से लेआउट प्रदान किया गया है। इसी आधार पर प्रबंध समिति की ओर से सर्वसम्मति से भूमि पूजन कर आवंटन की व्यवस्था निर्धारित की गई है।
इस मौके पर श्रीधराचार्य,महामंत्री अखिलेशाचार्य, स्वामी सारंगधराचार्य, स्वामी राजारामाचार्य के अलावा मेला प्रबंधक रविकांत द्विवेदी,सेक्टर मजिस्ट्रेट रमेश चंद्र ओझा के अलावा कई संत उपस्थित थे। उधर, अखिल भारतीय श्रीरामानुज वैष्णव समिति आचार्यबाड़ा के महामंत्री कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य ने इसे मनमान बताया। उनका कहना था कि भूमि आवंटन की तिथि 17-18 दिसंबर तय की गई है। इससे पहले मेला के लिए भूमि पूजन परंपरा को तोड़ने जैसा है।