कारण बताओ नोटिस पहले से ही पूर्वाग्रहग्रस्त मानसिकता से जारी किया गया था। आदेश में कोई ठोस कारण नहीं दिए गए और पूरा निर्णय केवल आरोप की गंभीरता के आधार पर लिया गया, जो किसी ठोस साक्ष्यों से समर्थित नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। कहा कि किसी भी ठेकेदार या व्यापारी को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट करना एक असंगत और अत्यधिक दंड माना जाता है, जब तक कि बेहद गंभीर कदाचार सिद्ध न हो जाए।
इसके साथ ही जब कारण-बताओ नोटिस में ही प्राधिकारी अपना निष्कर्ष पहले से तय कर लेता है तो बाद की पूरी प्रक्रिया एक खोखली औपचारिकता बनकर रह जाती है। कोर्ट ने खाद्य विभाग को स्वतंत्रता दी है कि वह चाहे तो कानून के अनुरूप नया कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है और नया आदेश पारित कर सकता है।