याची योगराज ने वर्तमान पीठासीन अधिकारी अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार की अदालत पर अविश्वास जताते हुए मामले को मुजफ्फरनगर से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने योगराज की याचिका खारिज करते हुए छह महीने में विचारण में पूर्ण करने का आदेश दिया था।
मुजफ्फरनगर में चल रहा विचारण अंतिम सुनवाई के स्तर पर है। इस बीच योगराज ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरण प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया। याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि याची पीठासीन अधिकारी अपर जिला व सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं है।
उन्हें इस अदालत से न्याय की उम्मीद नहीं है। इसलिए यह मामला किसी अन्य पीठासीन अधिकारी की अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाए। राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने भी स्थानांतरण प्रार्थना पत्र का विरोध नहीं किया।
उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद स्थानांतरण प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए कहा कि विचारण अपने अंतिम सुनवाई के स्तर पर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार छह माह में विचारण पूर्ण किया जाना है। उच्च न्यायालय ने याची की याचिका को बलहीन बताते हुए खारिज कर दिया।