इलाहाबाद (ब्यूरो)। नगर निगम सदन में 12 जुलाई को हुए बवाल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। महापौर ने भाजपा के चार पार्षदों की सदस्यता खत्म करने के लिए शुक्रवार को नगर विकास मंत्री को पत्र लिखा तो शनिवार को पार्षदों ने महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्षदों ने सदन में महापौर के इशारे पर भाजपा पार्षदों पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया। इन्होंने महापौर पर जानबूझ कर सीसीटीवी कैमरे भी खराब कराने का आरोप लगाया।
उधर, पार्षद किरन जायसवाल ने राज्यपाल राम नाईक को पत्र भेजकर महिला पार्षदों के अपमान, सीसीटीवी फुटेज गायब कराने और शासन को गलत जानकारी देने के मामले में जांच कराने और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मुख्य सचिव और नगर विकास सचिव को भी पत्र भेजकर कार्रवाई के लिए कहा है।
शनिवार को भाजपा पार्षदों की निगम कक्ष में बैठक हुई। इसमें पार्षद गिरीशंकर प्रभाकर ने आरोप लगाया कि सदन की बैठक में महापौर के इशारे पर भाजपा पार्षदों पर जानलेवा हमला कराया गया। भाजपा पार्षदों ने पूर्व में ही सीसीटीवी फुटेज देखकर कार्रवाई की मांग की थी। उस दौरान महापौर और नगर आयुक्त ने भी फुटेज के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। कहा कि महापौर सदन की अध्यक्ष होती हैं और उनकी जिम्मेदारी है कि सदन में सभी व्यवस्था दुरुस्त हो। सदन में लगे सीसीटीवी कैमरे महापौर ने साजिशन खराब कराए। आरोप लगाया कि महापौर ने काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा न कराके लोकतंत्र की आवाज को दबनाने और मनमाने तरीके से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हुए नया सवेरा योजना को पास कर दिया, जबकि सदन में उस पर चर्चा ही नहीं हुई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि महापौर की तानाशाही और निगम में भ्रष्टाचार से शासन को अवगत कराया जाएगा। इसमें पार्षद गणेश केसरवानी, भोला तिवारी, किरन जायसवाल, सत्येंद्र चोपड़ा, संजय गुप्ता, आंनद सिंह, आनंद सोनकर, पुष्पा कुशवाहा, सोनिका अग्रवाल, चंद्रभूषण सिंह, अश्वनी पांडेय, जया गुप्ता, विद्या द्विवेेेदी, प्रेमलता गुप्ता, बबलू सोनकर आदि शामिल थे।