तबले के साथ घुंघरुओं की नोकझोंक, मेघों की उमड़-घुमड़ के साथ राधा-कृष्ण के महारास और चीरहरण के भाव शनिवार को कथक नृत्य की तिहाइयों में पिरोए गए। छोटे-छोटे टुकड़े, छंदों और अलंकारों पर नृत्य के भाव इसी तरह सजाए गए। मौका था कथक नृत्य गुरु पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज की प्रथम पुण्य स्मृति पर 10 दिवसीय कथक महोत्सव के आगाज का।
यह नृत्य महोत्सव संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से कथक केंद्र में आयोजित किया गया है। कथक केंद्र के प्रेक्षागृह में कथक महोत्सव की शुरुआत अपर आयकर आयुक्त वीके राय ने दीप जलाकर की। सबसे पहले काव्या, चहक, स्नेहा ने नृत्यमत भावों में गणेश वंदना की। इसके बाद केंद्र की निदेशक उर्मिला शर्मा ने अपने गुरु पं. बिरजू महाराज के चित्र पर नत मस्तक होकर नृत्यमय पुष्पांजलि अर्पित की।
फिर उपज-थाट, नृत्य में खड़े होने का अंदाज, टुकड़े, छोटी-छोटी भावपूर्ण तिहाइयां लगाकर उन्होंने हर किसी का ध्यान खींचा। परन, परमेलु की विधा को कथक में पिरोते हुए दर्शकों के सामने बेहद आकर्षक प्रस्तुति उन्होंने दी। इसमें राधा-कृष्ण की छेड़छाड़, महारास, द्रौपदी चीर हरण, बादलों की गड़गड़ाहट, कृष्ण का गोप-ग्वालों संग यमुना किनारे गेंद खेलना, घोड़े की चाल पैरों के चलन से दिखाना, धनुष-तीर के अंदाज के कई भावों को कथक नृत्य में व्यक्त किया गया। इसके अलावा ईश्वर की पूजा करने के अंदाज को तीन तरह की भाव- भंगिमा में दिखाया गया।
इसी क्रम में सीधी, चंचल और घमंडी लड़की के भावों को भी नृत्य में प्रकट किया गया। इसी क्रम में पं. बिंदादीन महाराज रचित दादरा बिहारी को अपने बस कर पाऊं ... की बंदिश पर कृष्ण के बाल रूप की भाव-भंगिमाओं को प्रस्तुत कर संगीत प्रेमियों का ध्यान खींचा गया। संगत करने वालों में तबले पर आकाशवाणी के कलाकार पूरन मिश्र, पखावज पर मंजीत कुमार,गायन में संगीता राय,साइड रिदम पर अनुराग मिश्र ने संगत की। संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया। इस मौके पर अमरनाथ खरे, शुभम प्रजापति, अंकुर झारखरिया, गौरव, अमित शर्मा, नवीन पाठक, रूपम, सागर शुक्ला, सौरभ शर्मा, अर्चना भट्ट, डॉ. विमला व्यास, प्रीती श्रीवास्तव,कुसुम, सुमन मिश्रा, वर्षा विश्वकर्मा उपस्थित थे।