इसमें केमिकल ऑक्सीजन डिमांड की मात्रा 176 पीपीएम मिली, जो 250 होनी चाहिए, क्लोराइड 600 पीपीएम होना चाहिए। जबकि, जांच में दोगुने से अधिक 1100 पीपीएम पाया गया। अन्य तत्व तो उतने खतरनाक नहीं हैं, लेकिन क्रोमियम से फेफड़े का कैंसर, एग्जिमा एवं त्वचा संबंधी अन्य बीमारियों सहित अस्थमा का खतरा होता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी यह कमजोर बनाता है।
डॉ. सुरनजीत प्रसाद के अनुसार उनकी टीम ने जो बायोचार मैटीरियल (एडजॉरमेंट) तैयार किया है, वह टेनरियों से निकले वाले गंदे पानी से 95 फीसदी तक क्रोमियम को अलग सकता है। यह तकनीक काफी सस्ती और सुलभ है। अगर टेनरियों में इसका इस्तेमाल किया जाए, तो आधी लागत पर टेनरियों से निकलने वाले गंदे पानी को बेहतर तरीके से शोधित किया जा सकता है।
क्या है बायोचार, कैसे करता है काम
बायोचार एक प्रकार का चारकोल है, जो लकड़ी को बिना ऑक्सीजन के 500 डिग्री पर गर्म करके तैयार किया जाता है। टेनरी का गंदा पानी का बायोचार की सतह से स्पर्श होते ही 95 फीसदी क्रोमियम से अलग होकर सतह से चिपक जाता है और पानी में महज पांच फीसदी क्रोमियम ही रह जाता है।