इसके पहले खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान यूपी सरकार के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि शोध सहायक शिक्षक श्रेणी में नहीं आते हैं और उनकी नियुक्ति शिक्षणेत्तर कर्मचारी के रूप में हुई है। इस संबंध में यूपी सरकार की ओर से कई आदेश भी जारी हुए हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय में शोध सहायक के तौर पर तैनात कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। खंडपीठ ने पूर्व में एकल पीठ द्वारा दिए गए आदेश को सही माना है और कहा है कि शोध सहायक शिक्षक की श्रेणी में आते हैं। लिहाजा, उन्हें भी शिक्षकों की तरह 62 वर्ष की आयु में ही सेवानिवृत्त किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने यूपी सरकार की ओर से दाखिल विशेष याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है।
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इसके पहले खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान यूपी सरकार के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि शोध सहायक शिक्षक श्रेणी में नहीं आते हैं और उनकी नियुक्ति शिक्षणेत्तर कर्मचारी के रूप में हुई है। इस संबंध में यूपी सरकार की ओर से कई आदेश भी जारी हुए हैं। लेकिन, शोध सहायकों की ओर से कहा गया कि उनकी प्रारंभिक नियुक्ति शोध सहायक के रूप में हुई है, जो शिक्षक की श्रेणी में आते हैं। उनका वेतनमान भी उसी मानदंड के आधार पर तय हुआ है। यूपी सरकार उन्हें वही वेतनमान भी दे रही है। दोनों पक्षों काे सुनने के बाद कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश को सही मानते हुए हस्तक्षेप से इंकार कर दिया।