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बड़े रेल हादसे की साजिश उजागर

Thu, 27 Apr 2017 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद में बुधवार को एक बड़े रेल हादसे की साजिश उजागर हुई है। यहां इलाहाबाद जंक्शन के निकट जांच के दौरान महज छह किलोमीटर के क्षेत्र में 800 से ज्यादा पेंड्रोल क्लिप रेलवे ट्रैक से गायब मिले। इतनी बड़ी संख्या में पेंड्रोल क्लिप के गायब होने से एनसीआर मुख्यालय से लेकर डीआरएम ऑफिस तक हड़कंप मच गया। मामला सामने आने पर रेल प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुट गया। राहत यह रही कि इससे कोई रेल हादसा नहीं हुआ। नहीं तो इतनी ज्यादा संख्या में पेंड्रोल क्लिप गायब हो जाने से ट्रेनें भी ट्रैक से उतर सकती हैं।
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इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने पर बुधवार को तमाम अफसरों ने लगे हाथ रेल ट्रैक का मुआयना भी कर लिया। हालांकि अफसर इस बात का जवाब देने से बचते नजर आए कि आखिर इतनी संख्या में पेंड्रोल क्लिप गायब हुए भी तो आखिर कैसे? दरअसल बीते कुछ वर्षों के दौरान इलाहाबाद और उसके आसपास के इलाकों में तमाम ऐसे रेल हादसे हुए, जो संदेह के घेरे में रहे। इसके बाद रेल ट्रैक की निगरानी का निर्देश जीआरपी को दिया गया है। जीआरपी ने मंगलवार को सूबेदारगंज स्टेशन के पास एनसीआर मुख्यालय की तरफ जाने वाले रेलवे ट्रैक की जांच की तो उसे 40 पेंड्रोल क्लिप नहीं मिले। मामला सामने आया तो रेलवे अफसरों ने आरपीएफ को ट्रैक जांच करवाने का निर्देश दे दिया। सीनियर डीएससी डीके मौर्य का निर्देश मिलते ही आरपीएफ के संजीव पांडेय, सुरेंद्र कुमार, एनके यादव, वशिष्ठ कुमार पांडेय आदि ने किलोमीटर संख्या 821 से 824 एवं जंक्शन से किलोमीटर संख्या 827 तक का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अप लाइन में 380 एवं डाउन लाइन में 446 पेंड्रोल क्लिप कम मिले। इतना ही जांच के दौरान अप लाइन में 14 स्लीपर और डाउन लाइन में 30 स्लीपर टूटे मिले। इतनी संख्या में स्लीपर टूटे जाने की बात सामने आने पर रेल महकमे में हड़कंप मच गया। अफसर अब लीपापोती में जुट गए है।

इलाहाबाद-कानपुर रेल खंड में बीते कुछ वर्षों के दौरान कई ऐसे वाकये हुए हैं, जो सुर्खियों में रहे। यहां खुसरोबाग के पास डेढ़ वर्ष पूर्व रेलवे ट्रैक पर रॉड रखकर राजधानी एक्सप्रेस पलटाने की साजिश रची गई थी तो वहीं सिराथू स्टेशन पर शरारती तत्वों द्वारा रेलवे ट्रैक पर कंक्रीट की बैंच गिराकर भी संगम एक्सप्रेस को डीरेल करने की साजिश रची गई। पिछले साल मेजा में ट्रैक में मिला नकली बम भी खासा चर्चा में रहा। इसके अलावा पेंड्रोल क्लिप गायब होने के भी कई मामले सामने आए हैं।
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एक स्लीपर में होती है चार पेंड्रोल क्लिप की फिटिंग

महज छह किलोमीटर के क्षेत्र में 826 पेंड्रोल क्लिप गायब या टूटे होने के मामले पर रेलवे जरा भी गंभीर नहीं है। एनसीआर मुख्यालय और मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय होने के बावजूद यहां इतनी तादाद में पेंड्रोल क्लिप का गायब होना और स्लीपर का टूटना इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही को सीधे तौर पर दर्शाता है। बता दें कि एक किलोमीटर के क्षेत्र में तकरीबन 1500 पेंड्रोल क्लिप रेलवे ट्रैक पर होते है। इसी तरह हर एक स्लीपर को चार पेंड्रोल क्लिप जोड़ते हैं। अगर लगातार कई पेंड्रोल क्लिप स्लीपर से हट जाएं तो रेल ट्रैक उससे टेढ़ा हो सकता है। इससे ट्रेन भी पटरी से उतर सकती है।

रेलवे ट्रैक से पेंड्रोल क्लिप गायब हो जाने के मामले में एनसीआर के सीपीआरओ बिजय कुमार का कहना है कि ट्रेनों के संचालन के दौरान रेलपथ पर लगे क्लिप कई बार गिर जाते हैं। हालांकि कीमैन द्वारा पेंड्रोल क्लिप बाद में लगा दिए जाते हैं। ऐसे में लापरवाही की कहीं भी आशंका नहीं है। इस खंड के पैदल निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि जो भी स्लीपर टूटे हैं वे अलग-अलग स्थानों पर हैं। उनकी दूरी 50 मीटर से ऊपर की है। ऐसे में संरक्षा के लिए यह खतरा नहीं है।

बुधवार को भी जीआरपी को नैनी में रेलवे ट्रैक से 45 पेंड्रोल क्लिप गायब मिले। इस दौरान छह स्लीपर भी टूटे मिले। इसके पूर्व मंगलवार को भी एनसीआर के पास तकरीबन चार दर्जन पेंड्रोल क्लिप एवं छह स्लीपर टूटे मिले थे। दोनों ही मामलों की रिपोर्ट डीजीपी और रेलवे को भेजी गई है। एसपी जीआरपी केपी सिंह के मुताबिक आगे भी इस तरह की जांच जारी रहेगी।
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