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ग्रामीण पृष्ठभूमि का होना बड़ी चुनौती

Sun, 29 Apr 2018 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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जज्बा हो तो कहीं भी रहकर कुछ भी किया जा सकता है। इलाहाबाद में हंडिया तहसील के दसेर गांव के अनुभव सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा में आठवां स्थान हासिल किया है। आठवीं तक की शुरुआती शिक्षा उन्होंने गांव के एक निजी स्कूल से पूरी की। पिता धनंजय सिंह किसान और मां सुषमा देवी गांव के ही एक स्कूल में सामान्य कर्मचारी हैं।
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ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामान्य परिवार से होने के नाते उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अंग्रेजी बोलने और लिखने में भी दिक्कत आती थी, हिंदी भाषा में अच्छी पाठ्य सामग्री कम उपलब्ध हो पाती थी, लेकिन उन्होंने इन सभी चुनौतियों का डटकर सामना किया और हर मोर्चे पर खुद को साबित किया। नतीजा कि लगातार दूसरी बार आईएएस में उनका चयन हुआ। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने बेबाकी से अपने जीवन के अनुभव साझा किए। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के कुछ अंश-

सवाल: आपके हिसाब से आईएएस की तैयारी कैसे करें?
जवाब: तीन-चार साल पहले ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में प्रतिबद्धता के साथ जुट जाएं और अच्छी तरह से तैयारी होने के बाद परीक्षा में शामिल हों। ध्यान रखें की तैयारी सेलेबस के अनुसार करें। अतिरिक्त पढ़ने के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है।
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सवाल: जरूरी है कि तैयारी के लिए दिल्ली जाएं?
जवाब: तैयारी के लिए दिल्ली जाना जरूरी नहीं। मैं भी नहीं गया। अपनी इच्छा शक्ति की परख स्वयं करनी होगी।
सवाल: अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई ही सेलेक्शन का पैमाना है?
जवाब: भाषा पर पकड़ होने से फायदा तो मिलता ही है, लेकिन अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई सेलेक्शन का पैमाना नहीं है। हालांकि, यह जरूर है कि अधिकांश सफल प्रतियोगी अंग्रेजी माध्यम से ही होते हैं।
सवाल: तैयारी में सोशल मीडिया की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?
जवाब: परीक्षा की तैयारी के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर रहना ठीक नहीं। इसके सकारात्मक परिणाम कम होते हैं और समय का दुुरुपयोग अधिक होता है?
सवाल: तैयारी के लिए कोचिंग बेहतर है या सेल्फ स्टडी?
जवाब: जरूरी नहीं कि सिविल सेवा की परीक्षा में तैयारी के लिए कोचिंग की जाए। मैंने भी सेल्फ स्टडी की और सफलता मिली। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि मैं कोचिंग का विरोधी हूं। छात्रों को स्वयं का मूल्यांकन करना होगा कि तैयारी के लिए उन्हें किस तरह का मार्गदर्शन चाहिए।
सवाल: मुख्य परीक्षा में आपका सब्जेक्ट क्या था और यह सब्जेक्ट क्यों लिया?
जवाब: मुख्य परीक्षा में मेरा विषय गणित था। बचपन से ही यह मेरा रुचिकर विषय था। यह विषय स्कोरिंग भी है और परीक्षा में इसका फायदा मिलता है।
सवाल: आईएएस बनने के लिए इंजीनियरिंग के छात्रों की भीड़ क्यों?
जवाब: देश में हर साल 60 लाख छात्र इंजीनियर बनते हैं, लेकिन अच्छे रोजगार की कमी है। ऐसे में छात्र सिविल सेवा की ओर जाते हैं।
सवाल: कब मन में आया कि आईएएस बनना है और तैयारी शुरू कर दी?
जवाब: वर्ष 2013 की बात है। बीटेक द्वितीय वर्ष में था। उसी वक्त तय किया था कि आईएएस बनूंगा और तैयारी में जुट गया।
सवाल: नौकरी में रहते हुए तैयारी करने में क्या दिक्कतें आईं?
जवाब: पिछले साल भी आईएएस में सेलेक्शन हुआ था। इनकम टैक्स विभाग मिला था। एक साल तक अवैतनिक अवकाश पर रहकर तैयारी की और दोबारा चयन हुआ। किसी तरह की दिक्कत महसूस नहीं हुई।
सवाल: पढ़ाई के अलावा और क्या पसंद है?
जवाब: टेबल टेनिस खेलना, फिल्में देखना और पहाड़ी एवं समुद्री इलाकों में घूमना।
सवाल: तैयारी के लिए आप रोज पढ़ाई में कितना समय देते थे?
जवाब: कम से कम आठ से दस घंटे का वक्त तैयारी के लिए देना पड़ता था।
सवाल: आपकी कामयाबी में इलाहाबाद की क्या भूमिका रही है?
जवाब: धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल होने के नाते यहां मन की शांति मिलती है। एकाग्रता के साथ तैयारी करने का भी माहौल है। दिल्ली या दूसरे बड़े शहरों में यह सुकून नहीं है।
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सवाल: इलाहाबाद में रहकर आईएएस की तैयारी कर रहे प्रतियोगियों से क्या कहना चाहेंगे?
जवाब: इलाहाबाद के छात्र अपनी रुचि के अनुरूप पूरी एकाग्रता और प्रतिबद्धता के साथ तैयारी करें।
सवाल: अगला लक्ष्य क्या है?
जवाब: देश और समाज के लिए काम करना ही अब मेरा उद्देश्य है।
सवाल: अपनी कामयाबी का श्रेय किसे देना चाहेंगे?
जवाब: परिवार और दोस्तों से मिले सहयोग एवं प्रोत्साहन ही मेरी कामयाबी के कारण हैं।
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