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Prayagraj : संगमनगरी में अलंकृत होगी भारत रत्नों की बगिया, प्रोजेक्ट अलंकार के तहत मिले एक करोड़

Wed, 13 Nov 2024 08:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ज्ञान की अदृश्य सरस्वती की धारा से सिंचित संगमनगरी के इस कॉलेज की गौरवगाथा आने वाली पीढि़यों के लिए हमेशा प्रेरणाप्रद रहेंगी। 150 साल पुराने इस कॉलेज ने देश को महामना पंडित मदन मोहन मालवीय और राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन जैसे दो भारत रत्न भी दिए हैं। इनके अलावा राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा और मुख्यमंत्री के रूप में हेमवती नंदन बहुगुणा ने भी इस कॉलेज से किसी दौर में पढ़ाई पूरी की है।
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केपी इंटर कॉलेज, प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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देश को दो भारत रत्नों के साथ ही राष्ट्रपति और सीएम देने वाले केपी इंटर कॉलेज की आभा निखरने वाली है। एशिया के सबसे बड़े शैक्षणिक ट्रस्ट कायस्थ पाठशाला की ओर से संचालित इस कॉलेज का चयन योगी आदित्यनाथ सरकार के महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अलंकार के तहत किया गया है। इस योजना के तहत कॉलेज की ऐतिहासिक प्रयोगशालाओं से लेकर भवनों और मार्गों के कायाकल्प पर एक करोड़ रुपये खर्च होंगे।

ज्ञान की अदृश्य सरस्वती की धारा से सिंचित संगमनगरी के इस कॉलेज की गौरवगाथा आने वाली पीढि़यों के लिए हमेशा प्रेरणाप्रद रहेंगी। 150 साल पुराने इस कॉलेज ने देश को महामना पंडित मदन मोहन मालवीय और राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन जैसे दो भारत रत्न भी दिए हैं। इनके अलावा राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा और मुख्यमंत्री के रूप में हेमवती नंदन बहुगुणा ने भी इस कॉलेज से किसी दौर में पढ़ाई पूरी की है।

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अध्यात्म के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति अर्जित करने वाले महर्षि महेश योगी भी कभी इस कॉलेज में पढ़ा करते थे। यहां से निकली विभूतियों की लंबी सूची है। हिंदी साहित्य के जाने माने आलोचक बालकृष्ण भट्ट, प्रो. गया प्रसाद, जीएन वर्मा, एनसी मुखर्जी ने भी इसी कॉलेज में शिक्षण किया था। इस कॉलेज से पढ़कर निकले डॉ. ताराचंद्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति और रूस के राजदूत भी रहे।

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सात छात्रों से 1873 में हुई केपी कॉलेज में शिक्षण की शुरुआत

मुंशी काली प्रसाद कुलभाष्कर के सपनों को साकार करने वाला यह कॉलेज 150 साल पहले 1873 में बहादुरगंज मोहल्ले में सात विद्यार्थियों से शुरू हुआ था। इस कॉलेज के पहले अध्यापक शिवनारायण लाल साहेब थे। वकालत छोड़ मुंशी काली प्रसाद ने लगातार 13 साल तक इस विद्यालय में बच्चों को पढ़ाया। 1888 में कोलकाता विश्वविद्यालय से इस कॉलेज को मान्यता प्राप्त हुई। 1894 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्धता मिली थी। ब्यूरो

इस कॉलेज का प्रोजेक्ट अलंकार के तहत चयन किया गया है। यहां की प्रयोगशालाएं बहुत पुरानी और ऐतिहासिक हैं। इस योजना के तहत प्रयोगशालाओं का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इसके साथ ही शास्त्री भवन और उससे जुड़े मार्ग का कायाकल्प होगा। इस कॉलेज परिवार को अपने इतिहास पर गर्व हैं। यहां से पढ़कर एक से एक विभूतियां निकली हैं। डॉ. योगेंद्र सिंह, प्रधानाचार्य, केपी इंटर कॉलेज।

प्रजोक्ट अलंकार के तहत मिलने वाली एक करोड़ रुपये की धनराशि में 25 प्रतिशत कॉलेज का अंशदान है। पहली किस्त के रूप में 40 लाख रुपये जल्द ही जारी हो जाएंगे, ताकि काम शुरू कराया जा सके। डीआईओएस पीएन सिंह के साथ ज्वाइंट खाता भी खोलवा दिया गया है। - डॉ. सुशील कुमार सिन्हा, अध्यक्ष- केपी ट्रस्ट।

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