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Sucide : भगत सिंह देश के लिए फांसी झूले थे, ये मामूली मुश्किलों से ही हार गए

Fri, 12 Apr 2024 07:57 PM IST
विनोद सिंह सत्येंद्र पटेल, प्रयागराज

सार

बृहस्पतिवार भोर भी बड़ी बगिया लाला की सराय में रहने वाली डॉक्टर चंद्रा मिश्रा के बेटे आशुतोष (27) ने फांसी लगाकर जान दे दी। वह नर्सिंग का छात्र था। लगातार तीन दिनों में खुदकुशी की यह हैट्रिक है।
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अवसाद। - फोटो : Istock
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विस्तार
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23 बरस...यह उम्र मौत को गले लगाने की नहीं होती, जिंदगी जीने की है। घर, परिवार और देश-समाज के लिए कुछ करने की है। मगर, छह महीने में शहर के 10 नौजवान मामूली मुश्किलों से ही हार मान गए। इनकी मौत पर गहरा दुख सबको है। पर, एक मौत सरदार भगत सिंह की भी थी, जिन्होंने कठिन मुश्किलों के आगे कभी हार नहीं मानी और देश की खातिर हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए। उम्र उनकी भी 23 ही थी।

बृहस्पतिवार भोर भी बड़ी बगिया लाला की सराय में रहने वाली डॉक्टर चंद्रा मिश्रा के बेटे आशुतोष (27) ने फांसी लगाकर जान दे दी। वह नर्सिंग का छात्र था। लगातार तीन दिनों में खुदकुशी की यह हैट्रिक है। इसके पहले जिन प्रतियोगी छात्र-छात्राओं ने मौत को चुना था, वह विभिन्न जिलों से प्रयागराज तैयारी के लिए आए थे। इसलिए, ताकि सुहाने सपने गुन-बुन सकें। उन्हें साकार कर सकें।

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मगर, इन्होंने पहले ही हथियार डाल दिए।इन्हीं में सुल्तानपुर के हेमनपुर बलई गांव की श्रुति श्रीवास्तव (23) भी थीं। श्रुति ने 2020 में मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। एमबीबीएस करके लोगों की सेवा करने का सपना था उसका। लेकिन, 13 अक्तूबर की शाम हॉस्टल में उसके शव को फंदे से लटका देख सभी सन्न रह गए। सहपाठी, मां-बाप सब रोए...बिलखे, लेकिन फांसी की वजह न समझ पाए।

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सुल्तानपुर की ही अंतिम यादव (23) भी संगमनगरी के शिवकुटी क्षेत्र के गोविंदपुर में किराये का कमरा लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। 28 नवंबर, 2023 की देर रात उन्होंने भी कमरे के अंदर फांसी लगा ली। यही आत्मघाती कदम आजमगढ़ के रहने वाले सोनू यादव (23) ने भी उठाया। वह भी शिवकुटी थाना क्षेत्र में किराये का कमरा लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। 30 नवंबर, 2023 को उसका भी शव फंदे से लटकता मिला।

23 बरस का बालेंद्र गौतम मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला था। हाशिमपुर में किराये का कमरा लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। 25 अक्टूबर, 2023 को उसने भी जीवनलीला खत्म कर ली। गाजीपुर के ही रेवती गांव निवासी किसान सुभाष चंद्र राय के इकलौते बेटे अभिषेक राय (30) ने तो लेखपाल की लिखित परीक्षा पास कर ली थी। मगर, नौकरी ज्वाइन करने से पहले ही 18 अक्तूबर 2023 को जान दे दी।

बुलंदशहर के बड़ौदा गांव की रश्मि सिंह (30) टीजीटी की तैयारी के लिए प्रयागराज आई थीं। वह अल्लापुर में किराये के कमरे में रहती थीं। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक से दो साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। सबकुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन वैलेंटाइन डे (14 फरवरी) को न जाने क्या हुआ, रश्मि ने फंदे से लटक कर जान दे दी। इसका कारण न तो भाई बता पाया, न ही उनके पतिदेव।

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आभासी दुनिया में डूबना हो रहा घातक
 

मनोचिकित्सक डाॅ. विवेक कटियार बताते हैं कि प्रतिस्पर्धा का युग है और अपेक्षाएं बहुत ज्यादा। दूसरी मुसीबत पैदा की है, मोबाइल फोन ने। इसी में व्यस्त युवा पीढ़ी के लोग घर-परिवार और रिश्तेदारों तक से कटते जा रहे हैं। उनसे ठीक से बात भी नहीं करते। धीरे-धीरे उनकी आभासी दुनिया असल में बहुत छोटी होती चली जाती है। एकाकीपन के शिकार इन युवाओं को जैसे ही कोई इमोशनल झटका लगता है, उन्हें अपनी दुनिया वीरान दिखाई देती है और वह आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। युवाओं को चाहिए कि वह चैटिंग में न खोएं, लोगों से खूब बात करें। उनके अनुभवों से, जिंदगी से सीखें।

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