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UP: हाईकोर्ट में मनमाफिक मुकदमा लगाने के लिए बदली जा रही थीं बेंच आईडी, मुकदमों की लिस्टिंग में हेराफेरी उजागर

Thu, 13 Mar 2025 12:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुकदमों की लिस्टिंग में हैरतअंगेज हेराफेरी सामने आई है। महानिबंधक ने कोर्ट में पेश जांच रिपोर्ट में कहा है कि मनमाफिक मुकदमा सूचीबद्ध कराने के लिए कुछ लोग सर्वर के डाटाबेस में बेंच आईडी बदल देते थे।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुकदमों की लिस्टिंग में हैरतअंगेज हेराफेरी सामने आई है। महानिबंधक ने कोर्ट में पेश जांच रिपोर्ट में कहा है कि मनमाफिक मुकदमा सूचीबद्ध कराने के लिए कुछ लोग सर्वर के डाटाबेस में बेंच आईडी बदल देते थे। इससे उन अदालतों में मुकदमे सूचीबद्ध हो जाते थे, जिन्हें इनको सुनने का अधिकार ही नहीं था। महानिबंधक की मांग पर कोर्ट ने दोषियों पर कार्रवाई के लिए 24 अप्रैल तक का वक्त दिया है।

न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की अदालत ने गाजियाबाद के याची नरेंद्र चंचल जैन व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने सात मार्च को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बिना बेंच आईडी में बदलाव को प्रथम दृष्टया न्यायिक कार्रवाई में हस्तक्षेप करार दिया था। कोर्ट ने महानिबंधक को स्वयं जांचकर गड़बड़ी की रिपोर्ट पेश करने को कहा था। बुधवार को महानिबंधक राजीव भारती ने कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी। बताया कि सर्वर पर कुछ लोग अनधिकृत रूप से अदालतों की आईडी बदल रहे थे। इससे ऐसी अदालतों में मुकदमे चले गए, जिन्हें केस सुनने का अधिकार नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट के डाटा से छेड़खानी बेहद गंभीर अपराध है। महानिबंधक ने दोषियों पर कार्रवाई करने की अदालत से मोहलत मांगी। इसे मंजूर करते हुए कोर्ट ने 24 अप्रैल को कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट अगली सुनवाई चैंबर में करेगा।

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सात मार्च को सामने आया था मामला

हाईकोर्ट में आवेदनों की लिस्टिंग में गड़बड़ी का प्रकरण सात मार्च को न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की बेंच में ही सामने आया था। उन्होंने पाया कि नरेंद्र चंचल जैन एवं अन्य का प्रकरण उनके क्षेत्राधिकार में है, लेकिन इसकी लिस्टिंग किसी और के आदेश से हुई थी। इस पर बेंच सेक्रेटरी ने कोर्ट को बताया था कि ऐसे कई मामले देखने में आ रहे हैं कि मुकदमे की लिस्टिंग का आवेदन उन बेंच को भेजा जा रहा है, जिन्हें सुनवाई का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने महानिबंधक को स्वयं जांच करके 12 मार्च तक रिपोर्ट देने का आदेश दिया था।

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