इलाहाबाद। ट्रेनों पर लगातार दूसरे दिन भी कोहरे की मार पड़ी। घने कोहरे के कारण ट्रेनें रेंगते हुए चलीं। असर यह हुआ कि सुबह पहुंचने वाली ट्रेनें देर शाम को जंक्शन पर पहुंचीं। शुक्रवार की महानंदा 25 घंटे की देरी से चली। शनिवार की महानंदा अप और डाउन में 19 और 11 घंटे की देर चली। प्रयागराज, संगम एक्सप्रेस, नौचंदी, ऊंचाहार, लखनऊ इंटरसिटी, हरिद्वार एक्सप्रेस, रीवांचल, शिवगंगा, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, स्वतंत्रता सेनानी, मगध और महाबोधि जैसी सभी ट्रेनें पांच से 10 घंटे के बीच देर से पहुंचीं। इसके कारण ट्रेनों में फंसे यात्री झेल गए। खानपान की भारी किल्लत उठानी पड़ी।
सुबह जंक्शन पहुंचने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस 5.30 घंटे, संगम एक्सप्रेस सात घंटे की देरी से पहुंची तो परिजनों और परिचितों को रिसीव करने पहुंचे लोग खासे परेशान हुए। देर से आने के कारण संगम एक्सप्रेस को पुटबैक कर रात करीब 11 बजे रवाना किया गया। सहारनपुर से आने वाली नौचंदी एक्सप्रेस शाम को छूटने के आधे घंटे पहले जंक्शन पहुंची। सो, वापसी भी देर से हुई। ट्रेन पकड़ने के लिए प्लेटफार्म पर पहुंच गए यात्रियों को भीड़ के कारण बैठने तक की जगह नहीं मिली। इसके साथ ही कालका मेल 8.30 घंटे, नार्थईस्ट 10, तूफान 10, कोलकाता एक्सप्रेस 12, मगध एक्सप्रेस 14, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस 13.30 घंटे की देरी से जंक्शन पहुंचीं। रीवांचल 7.30 घंटे, शिवगंगा पांच, पुरुषोत्तम 7.30 घंटे, डाउन पुरुषोत्तम छह घंटे, ब्र्हमपुत्र मेल पांच घंटे की देरी से पहुंचीं। रेलवे अफसरों के मुताबिक ड्राइवरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कोहरे के घनत्व को देखते हुए ट्रेनों को चलाएं। ट्रैक न दिखे तो अधिकतम 10 किमी की गति से गाड़ी चलाई जाए। कोहरा न छटा तो ट्रेनों की लेटलतीफी और बढ़ने की आशंका है।
कोहरे के दौरान ट्रेनें दुर्घटना की शिकार न हों। कर्मचारी भी पूरी तरह सतर्क रहें। इसे लेकर शनिवार को प्रयाग स्टेशन पर सेफ्टी सेमिनार का आयोजन किया गया। कर्मचारियों को ट्रेन संचालन का गुर सिखाने के लिए लखनऊ डिवीजन से सीनियर डीएसओ, सीनियर डीएमई, एडीईएन प्रयाग राकेश सैनी, स्टेशन अधीक्षक पीके मणि त्रिपाठी, एलए जाफरी, रजनीश सिंह, एसएस सिंह, अनूप श्रीवास्तव, टीआई संजय, विजय मिश्रा समेत परिचालन, सिगनल, इंजीनियरिंग, ड्राइवर्स, लोको इंस्पेक्टर्स आदि शामिल हुए।