प्रशासन का अनुमान था कि वसंत पंचमी पर तकरीबन 50 लाख श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाएंगे। स्नानपर्व से एक दिन पहले तक अफसर खुद अपने दावे को लेकर सशंकित थे लेकिन शनिवार सुबह खिली धूप न सिर्फ श्रद्धालुओं, अफसरों के लिए भी राहत लेकर आई। धूप खिलने के साथ ही मेला क्षेत्र में भीड़ बढ़ने लगी और फिर शाम तक यह सिलसिला जारी रहा। अब अफसर दावा कर रहे हैं कि मेला क्षेत्र में अनुमान से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।
मौनी अमावस्या पर जिस तरह एक दिन पहले ही मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी, अफसरों को उम्मीद थी कि वसंत पंचमी पर भी ऐसा ही होगा लेकिन शुक्रवार रात तक घाटों पर गिनती के श्रद्धालु मौजूद थे। हालांकि मेला प्रशासन ने अनुमानित भीड़ के हिसाब से ही तैयारियां की थीं। स्नान के लिए 11 घाट बनवाए गए थे। मेला क्षेत्र में स्नान को पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए घाटों के आसपास 100 और परेड मैदान पर 350 शिविर भी लगाए गए थे। घाटों पर जीरो डिस्चार्ज वाले टॉयलेट्स की भी व्यवस्था की गई थी। अफसरों को सिर्फ एक ही आशंका सता रही थी कि जो तैयारियां की गईं, उसके हिसाब से भीड़ पहुंचेगी या नहीं लेकिन सुबह धूप खिलते ही मेला क्षेत्र की रौनक बढ़ने लगी।
भोर के वक्त घाटों पर श्रद्धालु तो दिखे लेकिन उनकी संख्या अपेक्षा से कम थी लेकिन सुबह आठ बजे के बाद जैसे ही धूप खिली घाटों पर स्नानार्थियों को रेला उमड़ पड़ा। दोपहर तक घाटों पर श्रद्धालुओं की जबर्दस्त भीड़ हो गई। साथ ही पांटून पुल और मेला क्षेत्र की सड़कें श्रद्धालुओं से खचाखच भरी नजर आईं। श्रद्धालुओं के लिए बने शिविरों में भी पैर रखने की जगह नहीं बची। इस दौरान कमिश्नर बीके सिंह, डीएम भवनाथ सिंह, एडीएम सिटी एसके शर्मा भी घाटों पर निरीक्षण करते रहे। हालांकि गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण कटान की समस्या पैदा हो जाने से अफसर परेशान थे कि घाटों पर इसका प्रभाव न पड़े। हालांकि शुक्रवार को ही घाटों की मरम्मत करा दी गई थी लेकिन गहराई बढ़ जाने के कारण घाटों की चौड़ाई कम कर दी गई। इसकी वजह से घाटों पर स्नान के दौरान कुछ अव्यवस्था नजर आई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।