माघ मेले के चौथे महत्वपूर्ण स्नानपर्व वसंत पंचमी पर शनिवार को भी लाखों श्रद्धालुओं ने संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाकर पुण्यार्जन किया। साफ मौसम में संगम तक दस्तक देने में शहरी भी पीछे नहीं रहे। बड़ी संख्या में शहरी भी वसंत की डुबकी लगाने घाटों तक पहुंचे। स्नान का क्रम भोर से ही शुरू हो गया था जो शाम तक जारी रहा। साफ मौसम ने श्रद्धालुओं का हौसला बढ़ाया और अनुमान से ज्यादा लोग जुटे। शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद, स्वामी वासुदेवानंद, स्वामी नरेंद्रानंद सहित अनेक संत ने भी पंचमी का स्नान किया।
परंपरा के मुताबिक डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने पहले जल में शिव, सूर्य को अर्घ्य दिया, घाट किनारे पूजा अर्चना की और फिर गंगापुत्र घाटियों के यहां भी तिलक-चंदन लगवाया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने गोदान सहित कई तरह के दान भी दिए। श्रद्धालु गंगाजल सहित रेती का प्रसाद लेकर घरों की ओर लौटे। तन-मन भीगा तो रास्ते की सारी थकान काफूर हो गई। संगम की रेती पर ही बैठकर उन्होंने लाई चूड़ा, लड्डू और हलुआ-पूड़ी का प्रसाद लिया। घाटों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस सहित आरएएफ और कमांडो ने संभाली। माला-फूल, दूध, डिब्बे बेचने वालों को घाटों से दूर ही रखा गया था। महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए घाटों के किनारे चेंजिग रूप बने हुए थे।
वसंत पर डुबकी लगाने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय कल्पवासियों के परिजन भी पहुंचे। पर्व पर रेती पर बसी कल्पवासियों की कुटिया में रौनक रही। स्नान के बाद अनेक शिविरों में भोजन-प्रसाद का भंडारा भी हुआ जिसमें पूरा परिवार शामिल हुआ। चौथे स्नानपर्व पर नौ हजार से ज्यादा श्रद्धालु अपने परिजनों से बिछुड़ कर त्रिवेणी बांध के नीचे बने भूले भटके के शिविर में पहुंचे। इसमें बीस से ज्यादा बच्चे भी थे। रात तक सभी श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाया गया।