रागरंग की विविध कलाओं से इतर शनिवार को सांस्कृतिक केंद्र आम के रसों से समृद्ध हुआ। जिला प्रशासन, एनसीजेडसीसी, संस्था संचारी एवं उद्यान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिनी आम महोत्सव ‘रस बरसे’ में देश की खास प्रजातियों सहित दूर देश दक्षिण अमेरिका के फ्लोरिडा की प्रजातियों का संगम हुआ। फ्लोरिडा की कम रेशे वाले टॉमी एटकिन्स, सेन्शेसन के चाहने वाले रहे तो लखनऊ का सुर्खा झागड़बाग, मल्लिका और पपीतियो के दीवाने भी रहे। इन किस्मों को करीब से देखने के लिए हर कोई बेताब रहा। गांव-देहात से आए किसानों ने आमों की इन प्रजातियों के पौधों की मांग की।
महोत्सव में उद्यान विभाग की ओर से लगाए गए स्टाल पर चौसा, लगड़ा, दशहरी, सफेदा के साथ लखनऊ की मल्लिका, आम्रपाली, फजरी, सिंदूरी, दशहरी-51, हुस्नारा, भदैया, सीपिया, याकूति, रामकेला, मलदहिया, समरबहिश्त चौसा, आमकृष्ण भोग, मलगोवा, किसनभाग, हिमसागर समेत कुल 40 प्रकार की प्रजातियों ने आम के शौकीनों से रिश्ता जोड़ा।
चंद्रशेखर आजाद पार्क के उद्यान अधिकारी आरएस यादव, खुसरोबाग के मुख्य उद्यान विशेषज्ञ डॉ.बीपी राम ने बताया कि फ्लोरिडा की आम की प्रजाति टामी एटकिन्स और सेन्सेशन यहां भी विकसित की जा रही है ताकि यहां के किसान भी इसका उत्पादन कर मुनाफा कमा सकें। करछना के किसान तिलकधारी, बसंत, सुरेश आदि ने इन प्रजातियों के पौधों की मांग की। इस दौरान सियाट्स और सीआरपीएफ वाइफ एसोसिएशन की ओर से लगाए गए स्टाल पर लोगों ने आम से बने व्यंजनों केक, मालपोवा, जूस, अमावट, पना, दही, लस्सी, आइसक्रीम, अचार आदि का स्वाद लिया। एसोसिएशन की मीतू सिंह ने बताया महोत्सव में मिले लाभ को जवानों के परिवारों के कल्याण पर खर्च किया जाएगा।
महोत्सव में विभिन्न निजी संस्थाओं की ओर से खाने-पीने की चीजों, कपड़ों, आम के बनी चीजों के अलग-अलग स्टाल पर लोगों ने खरीददारी भी की। इस दौरान हुई प्रतियोगिताओं में अनामिका, शिल्पा सरोज, अंचित यादव प्रथम, बिंदु मौर्या, दुर्गा, शिवानी शर्मा द्वितीय, आरती बिंद, कीर्ति प्रजापति तृतीय स्थान पर रहीं। किसानों के लिए भी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई। इसमें मांडा के किसान राम बहादुर पटेल प्रथम, चाका के शिव सागर द्वितीय, शंकरगढ़ के रामकृष्ण पटेल तीसरे स्थान पर रहे।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वीके शुक्ला का कहना है कि आम महोत्सव जैसे आयोजन से हार्टी टूरिज्म का विकास किया जा सकता है। एनसीजेडसीसी में शुरू हुए दो दिनी आम महोत्सव के उद्घाटन के बाद उन्होंने कहा, ऐसे महोत्सव से लोग न केवल आम बल्कि फलों की दूसरी प्रजातियों से भी रूबरू होंगे। किसानों को भी लाभ मिलेगा। ऐसे फलों के उत्पादन से शहर की अलग पहचान बनेगी।
उन्होंने महोत्सव में लगे आमों के स्टाल भी देखे और उनकी प्रजातियों के बारे में जानकारी हासिल की। न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल, लोकायुक्त संजय मिश्र, एडवोकेट विजय बहादुर सिंह भी महोत्सव में मौजूद थे। अतिथियों का स्वागत डीएम संजय कुमार और संचालन डॉ.रंजना त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में एनसीजेडसीसी के निदेशक गौरव कृष्ण बंसल, सीडीओ आन्द्रा वामसी, पूर्व सीडीओ एके रॉय, अपर जिलाधिकारी डॉ.विपिन मिश्र, अनिल गुप्ता, जिला उद्यान अधिकारी उमेश उत्तम समेत उद्यान विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
एनसीजेडसीसी के दो दिनी आम महोत्सव की शाम रागरंगों के नाम हुई। संगीत संध्या में सुपरिचित गायक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ.हरिओम ने गीतों, गजलों से सभी को सम्मोहित किया। उन्होंने ‘मैं कौन हू, प्यार का मारा हुआ हूं, सिकंदर हूं मगर हारा हुआं हूं’ सुनाकर समां बांधा। फिर ‘चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो’ सहित कई अन्य गजलों से लोगों को सराबोर किया।
वहीं जादूगर अशोक नारायण शुक्ला का जादू भी सभी के सिर चढ़कर बोला।
उन्होंने अपने तरह-तरह के जादू से बच्चों ही नहीं बड़ों का भी जमकर मनोरजंन किया। जादू से परिसर में मौजूद सभी लोगों को हतप्रभ कर खूब तालियां बटोरी। इसके अलावा राजस्थान के बांदीकुईं से आए बहुरूपिये शिवराज एवं दल, फैजाबाद से आए मुकेश एवं उनके दल सहित स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध किया। शिल्प मेले सहित अन्य कार्यक्रमों के दौरान सांस्कृतिक कें द्र में दर्शकों, श्रोताओं के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन आम महोत्सव के दौरान शनिवार को व्यवस्था की खामियां जमकर उजागर हुईं। खुले आसमान के नीचे हुए उद्घाटन कार्यक्रम में तेज धूप में बच्चे और बड़े दोनों ही बेहाल रहे। महोत्सव के लिए बुलाए गए विभिन्न स्कूलों के बच्चे घंटों खुली धूप में बैठे रहे।