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बार कौंसिल चेयरमैन को नहीं है एल्डर कमेटी गठित करने का अधिकार: हाईकोर्ट

Sat, 10 Oct 2020 01:06 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बार कौंसिल ऑफ उत्तर के चेयरमैन को किसी अधिवक्ता संघ की एल्डर कमेटी भंग करने या नई कमेटी बनाने का अधिकार नहीं है। कौंसिल की भूमिका अधिवक्ता संघ का बाइलॉज स्वीकृत करने और वकीलों के वरिष्ठता आदि के आपसी विवाद तय करने तक सीमित है। वह चुनाव को लेकर एल्डर कमेटी बनाने जैसे आदेश नहीं दे सकते हैं। मेरठ बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ ने यह निर्णय दिया। 
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मेरठ बार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि बार कौंसिल चेयरमैन ने एक शिकायत के आधार पर एल्डर कमेटी के दो सदस्यों लक्ष्मीकांत त्यागी और गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी को इस आधार पर बाहर निकाल दिया कि वह नियमित वकालत नहीं कर रहे हैं। एक और सदस्य ब्रह्मपाल सिंह को बिना कारण बताए एल्डर कमेटी से बाहर कर दिया गया। चेयरमैन ने 29 जून 2020 को नई एल्डर कमेटी गठित करके चुनाव कराने का निर्देश दिया है जो कि अवैधानिक है। 

नई एल्डर कमेटी ने चुनाव प्रक्रिया शुरू करते हुए 15 जुलाई, पांच अगस्त और 20 अगस्त को निर्णय लिए हैं, जो अवैध हैं। चेयरमैन के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इस मुद्दे पर विचार करने के बाद कहा कि चेयरमैन को एल्डर कमेटी के काम में दखल का अधिकार नहीं है और न ही कमेटी भंग कर नई कमेटी बनाने का अधिकार है।
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कोर्ट ने बार कौंसिल चेयरमैन द्वारा गठित एल्डर कमेटी को अधिवक्ता संघ का चुनाव कराने व अन्य कार्यों में दखल देने के लिए अक्षम करार देते हुए पूर्व कार्यकारिणी द्वारा 14 मई 19 को गठित एल्डर कमेटी को चुनाव संबंधी निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि चुनाव के संबंधी में कोई विवाद होता है तो उसका निस्तारण सोसाइटी रजिस्टेशन एक्ट के प्रावधानों के तहत किया जाए। मेरठ बार की पूर्व कमेटी ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से एक माह पूर्व चुनाव के संबंध में लिए गए निर्णय को उचित करार देते हुए कहा कि इसमें कोई अवैधानिकता नहीं है।
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