इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता को कनिष्ठ अभियंता पद पर पदावनति देने के चेयरमैन विद्युत पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पांच अप्रैल 23 के आदेश पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार व निगम से याचिका पर छह हफ्ते में जवाब मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता को कनिष्ठ अभियंता पद पर पदावनति देने के चेयरमैन विद्युत पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पांच अप्रैल 23 के आदेश पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार व निगम से याचिका पर छह हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई 21अगस्त को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने विद्युत निगम के कानपुर नगर विद्युत विभाग में सहायक अभियंता इकधार चरण की याचिका पर दिया है।
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याची का कहना था कि याची के खिलाफ शिकायत की जांच कमेटी की रिपोर्ट से ही स्पष्ट है कि उसे सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। रेग्यूलेशन 7(4)के अंतर्गत जांच के दौरान आरोपी कर्मचारी को सुनवाई का अवसर दिये जाने की व्यवस्था दी गई है।
याची अधिवक्ता का कहना है कि जांच के आधार पर उसका दो वार्षिक इंक्रीमेंट रोक दिया गया।इस आदेश के खिलाफ अपील पर उसकी सजा बढ़ाते हुए पदावनति भी दे दी गई। जिसमें उसे सुना नहीं गया। सरकारी वकील ने कहा वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई का मौका दिया गया था। आरोप गंभीर है इसलिए अपील में सजा बढ़ाने का आदेश सही है। कोर्ट ने मामला विचारणीय माना और जवाब तलब किया है।