कांग्रेस नेता सचिन चौधरी के खिलाफ युवा बीजेपी नेता अक्षत अग्रवाल ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि युवा कांग्रेसी नेता ने प्रधानमंत्री मोदी और उद्योगपति अदाणी के बीच आपसी संबंधों को लेकर अभद्र टिप्पणी की। इससे उसकी भावनाएं आहत हुई हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अदाणी के बीच प्रेम संबंध टिप्पणी करने को लेकर संभल में दर्ज प्राथमिकी पर युवा कांग्रेसी नेता सचिन चौधरी को राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला संज्ञेय अपराध का प्रतीत होता है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की खंडपीठ ने सचिन चैधरी की ओर से प्राथमिकी रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
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याची के खिलाफ युवा बीजेपी नेता अक्षत अग्रवाल ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि युवा कांग्रेसी नेता ने प्रधानमंत्री मोदी और उद्योगपति अदाणी के बीच आपसी संबंधों को लेकर अभद्र टिप्पणी की। इससे उसकी भावनाएं आहत हुई हैं। पीएम उनके लिए भगवान की तरह हैं। हिंदू संगठनों की भावना को भी आघात पहुंचाया गया है।
याची की ओर से कहा गया कि उसे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उसके द्वारा कहे गए शब्द आईपीसी के तहत अपराध नहीं है। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। कोर्ट ने संज्ञेय अपराध मानते हुए प्राथमिकी रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया।