याची का कहना था कि याची के पिता निजामुद्दीन के नाम भवन के एक हिस्से का 13 दिसंबर 1995 का बैनामा है। जिसे किसी अदालत में चुनौती नहीं दी गई है। वह भवन स्वामी होने के नाते कब्जे में है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के अर्दली बाजार निवासी याची के आवास के ध्वस्तीकरण व बेदखली के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि याची के आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही प्राधिकारी अधिकारी भू अधिग्रहण कर सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह तथा न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने फखरूद्दीन कुरैशी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
विज्ञापन
याची का कहना था कि याची के पिता निजामुद्दीन के नाम भवन के एक हिस्से का 13 दिसंबर 1995 का बैनामा है। जिसे किसी अदालत में चुनौती नहीं दी गई है। वह भवन स्वामी होने के नाते कब्जे में है। विकास प्राधिकरण जिला अदालत से सन्दहा रोड वाया आशापुर का चौड़ीकरण कर रहा है। याची की जमीन का न तो अधिग्रहण किया गया है और न ही अधिकारियों के साथ उसका कोई करार हुआ है। जबरन उसके मकान को ध्वस्त करने की कोशिश की जा रही है।
राज्य सरकार के अधिवक्ता का कहना था कि राजस्व अभिलेखों में भवन व जमीन महाराजा बनारस के नाम दर्ज है। बैनामा करने वाले का जमीन पर स्वामित्व नहीं था, इसलिए याची को जमीन का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। अन्य भवन स्वामियों से सड़क चौड़ीकरण के हक में करार हो चुका है। याची से करार की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि बैनामा निरस्त करने के लिए कोई वाद लंबित नहीं है। ऐसे में याची की आपत्ति सुनकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।