इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मानसिक रूप से विक्षिप्त नाबालिग का जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोपी मौलवी की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी। न्यायमूर्ति समीर जैन की कोर्ट ने मौलवी सैयद शाद काजमी उर्फ मोहम्मद शाद की ओर से दाखिल की गई अर्जी पर यह आदेश दिया।
कानपुर नगर के नौबस्ता में एक मस्जिद के मौलवी सैयद शाद काजमी पर विक्षिप्त नाबालिग का जबरन धर्म परिवर्तन कराने समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी फरवरी 2024 से जेल में है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की है।
अधिवक्ता ने दलील दी कि आवेदक को झूठे आरोप के आधार पर मामले में आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता का बेटा मानसिक रूप से विक्षिप्त था। वह इधर-उधर घूमता रहता था। अक्सर वह मदरसे में जाता था और वहीं रहता था। आवेदक ने न तो उसका धर्म परिवर्तन कराया और न ही उसके लिए मजबूर किया। वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि आवेदक मस्जिद में मौलवी है। उसने नाबालिग का जबरन धर्म परिवर्तन कराकर एक मदरसे में रखा। नाबालिग ने भी अपने बयान में यह बात कही है। ब्यूरो