रफीक की गिरफ्तारी नहीं हुई। 30 जनवरी 2020 को रफीक अंसारी के खिलाफ मेरठ की एक अदालत ने गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। एक अन्य मामले में 101 वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस इन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। 27 मई 2024 को गिरफ्तारी तब हुई जब हाईकोर्ट ने उनके मामले का संज्ञान लिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 साल पुराने जानलेवा हमले के आरोपी मेरठ से समाजवादी पार्टी के विधायक रफीक अंसारी की जमानत मंजूर करते हुए रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की अदालत ने दिया है। मामला मेरठ के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2007 में नगर निगम मेरठ के एक ठेकेदार ने आरोप लगाया था कि रफीक अंसारी ने उनके ऊपर चाकू से हमला किया है। इस मामले में चार साल बाद 2011 में चार्जशीट दाखिल हुई थी।
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हालांकि, रफीक की गिरफ्तारी नहीं हुई। 30 जनवरी 2020 को रफीक अंसारी के खिलाफ मेरठ की एक अदालत ने गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। एक अन्य मामले में 101 वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस इन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। 27 मई 2024 को गिरफ्तारी तब हुई जब हाईकोर्ट ने उनके मामले का संज्ञान लिया।
दरअसल सितंबर 1995 में रफीक अंसारी समेत 35-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में 22 आरोपियों को बरी किया जा चुके थे। लेकिन रफीक अंसारी कभी कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस पर मेरठ की एमपी एमएलए कोर्ट ने आईपीसी की धारा 147, 436 और 427 के आरोप में 101 गैर जमानती वारंट जारी किये थे।
इसके खिलाफ उन्हाेंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हैरानी जताई कि 101 वारंट के बावजूद गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। खफा कोर्ट ने उनकी याचिका को रद्द करते हुए पुलिस महानिदेशक को गिरफ्तारी के निर्देश दिया था। इसके बाद पुलिस ने 27 मई को उन्हें बाराबंकी से गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया था। काेर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया था।