बिजनौर के प्रेमी युवक को हिरासत में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी दरोगा की जमानत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मौत फांसी लगाने से हुई है। आत्महत्या के लिए उकसाने के ठोस सबूत के अभाव में जमानत से इन्कार नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की अदालत ने बिजनौर के स्योहारा थाने में तैनात रहे दरोगा सुनील कुमार की जमानत अर्जी पर दिया है।
यह चर्चित मामला शामली के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। बिजनौर के स्योहारा थाना क्षेत्र के मुंडाखेड़ी गांव के रहने वाले दीपक पर एक नाबालिग को भगाने के आरोप में पीड़िता के परिजनों ने मुकदमा दर्ज कराया था। तलाश में जुटे दरोगा सुनील कुमार की टीम ने युगल को चंडीगढ़ से बरामद किया था। वहां से बिजनाैर लाैटते वक्त शामली में गाड़ी खराब होने पर दरोगा अपने पैतृक घर (शामली के दयानंद नगर) पर प्रेमी जोड़े संग रुका था। इस दाैरान प्रेमी को ऊपर के कमरे में बंद कर दिया, जबकि महिला कांस्टेबल संग लड़की अलग कमरे में सोई थी।
इसी दौरान पुलिस टीम को रात में दीपक का शव फंदे से लटका मिला। मामले में दीपक के परिजनों की तहरीर पर दरोगा और लड़की के परिजनों समेत पुलिस टीम पर मुकदमा दर्ज किया गया। फिर आरोपी दरोगा को जेल भेज दिया गया। जेल में बंद दरोगा ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि आत्महत्या के लिए उकसाने और यातना देने के आरोप मौखिक हैं। कोई ठोस सबूत नहीं है। इस पर कोर्ट ने दरोगा की जमानत मंजूर कर ली।