उधर, तब तक आग दूसरे तल पर पहुंच चुकी थी। व्यापारी आग की लपटों के बीच बालकनी में खड़े रहे और अपनी आंखों के सामने जिंदगीभर की मेहनत से खड़े किए गए कारोबार को धू-धूकर जलता देखते रहे। तब तक फायर ब्रिगेड की टीम भी उन्हें वहां से सुरक्षित बचाने के लिए सीढि़यों के सहारे से बगल की छत से उनके पास पहुंच गई, लेकिन विनोद वहां से हटने को तैयार नहीं थे। कुछ ही देर बाद धुंए से उनकी सांस फूलने लगी और वह नीचे बैठ गए। फायर ब्रिगेड कर्मी और पड़ोसियों की मदद से उन्हें बगल की छत से नीचे उतारा गया। उन्हें एंबुलेंस से एसआरएन अस्पताल ले जाया जा रहा था कि तभी रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।