इलाहाबाद हाईकोर्ट को जिला प्रशासन ने बताया कि मुहर्रम के दौरान बड़ा ताजिया का जुलूस निकाले जाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। मुस्लिम संगठन जुलूस निकालना चाहे तो प्रशासन पूरा सहयोग करेगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट को जिला प्रशासन ने बताया कि मुहर्रम के दौरान बड़ा ताजिया का जुलूस निकाले जाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। मुस्लिम संगठन जुलूस निकालना चाहे तो प्रशासन पूरा सहयोग करेगा। यह जानकारी मिलने पर ऐतिहासिक मुहर्रम कमेटी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने मामले में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया।
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साथ ही याचिका निस्तारित करते हुए स्पष्ट किया कि प्रशासन को जुलूस से आपत्ति नहीं है तो जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि विवाद मुस्लिम समुदाय और उनके धार्मिक संगठनों का आंतरिक मामला है। बड़े ताजिए के जुलूस पर फैसला मुस्लिम समुदाय और उनके संगठन आपसी तालमेल से कर सकते हैं।
मुहर्रम कमेटी ने जनहित याचिका दाखिल कर वक्फ ताजिया कलां के अध्यक्ष रेहान खान के उस फैसले पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने इस साल बड़ा ताजिया का जुलूस निकालने से इन्कार कर दिया है। याची संगठन ने दावा किया था कि बड़ा ताजिया जुलूस की परंपरा 200 साल पुरानी है। बिना किसी कारण ताजिया नहीं निकालने से लोग की भावनाएं आहत हो रही हैं। इन दलीलों पर कोर्ट ने जिला प्रशासन से विवाद पर विस्तृत जानकारी तलब की थी।