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Prayagraj: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से भी मेला प्राधिकरण को जारी किया गया नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब

Wed, 21 Jan 2026 04:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से ज्योतिष मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस भेजने के बाद शंकराचार्य की तरफ से भी मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को कानूनी नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है।
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शंकराचार्य स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से ज्योतिष मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस भेजने के बाद शंकराचार्य की तरफ से भी मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को कानूनी नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है। जिसमें कहा गया है मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य लिखने पर नोटिस जारी कर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की गई है। साथ ही इसे अपमानजनक बताया है। प्रशासन की ओर से 19 जनवरी को जारी नोटिस को वापस लेने की माग की गई है।

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अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से जारी लीगल नोटिस में कहा गया है कि शंकराचार्य को लेकर पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में प्रशासन का हस्तक्षेप शीर्ष अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है। साथ ही दंडनीय है। यदि प्रशासन 24 घंटे के भीतर अपना नोटिस वापस नहीं लेता है तो मानहानि और अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। आठ पेज के इस नोटिस को मेला प्राधिकरण के दफ्तर के बाहर चस्पा करने के साथ ही कार्यालय में भी रिसीव कराया गया है और ईमेल के माध्यम से भी मेला प्रशासन को भेजा गया है। 

मेला प्रशासन को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भेजा जवाब

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शंकाराचार्य के संबंध में मांगे गए साक्ष्य के जवाब में प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण को जवाब भेज दिया है। आठ पन्ने के जवाब में कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद जी ही ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के जिस आदेश का हवाला दिया गया है, वो 14 अक्तूबर 2022 का है जबकि 11 सितंबर 2022 को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के अगले दिन 12 सितंबर को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आश्रम में शंकराचार्य के तौर पर उनका पट्टाभिषेक हो चुका था। जब उनका पट्टाभिषेक सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने से पहले ही हो चुका है तब उनके ऊपर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश लागू ही नहीं हो सकता है। 

नोटिस के जवाब पर ली जाएगी विधिक राय : मेलाधिकारी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अधिवक्ता की ओर दाखिल किए गए जवाब के बाद अब सभी की नजरें मेला प्रशासन के अगले कदम और शासन के रुख पर टिकी हैं। मेलाधिकारी ऋषिराज ने माना कि मेला प्राधिकरण कार्यालय के बाहर नोटिस का जवाब चस्पा किया गया है। उन्होंने बताया कि एक कमेटी गठित कर विधिक राय ली जा रही है। विधिक परामर्श के बाद अगला कदम उठाया जाएगा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद

मेला प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में आ गई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बात की और बुधवार को उनके निर्देश पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय शंकराचार्य से मिलने उनके शिविर में पहुंचे। माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि भाजपा सरकार सनातन धर्म की बात तो करती है पर एक संत के अपमान पर चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला किसी बड़ी साजिश का हिस्सा प्रतीत हो रहा है और इसे सदन में जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
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मेला प्रशासन ने जारी किया दूसरा नोटिस

प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बिना किसी अधिकार के शंकराचार्य नाम का दुरुपयोग कर मौनी अमावस्या मेले में बग्घी से आकर अव्यवस्था  फैलाई गई। 24 घंटे में जवाब न मिलने पर बद्रिकाश्रम हिमालय सेवा शिविर नाम से आवंटित अविमुक्तेश्वरानंद की भूमि को निरस्त करने और उनको हमेशा के लिए माघ मेले में उनका प्रवेश प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी गई है।

हालांकि इस बार नोटिस पर किसी अधिकारी का नाम या पद नाम नहीं है बल्कि अधिकृत हस्ताक्षरी के नाम से नोटिस भेजा गया है। साथ ही यह नोटिस 18 जनवरी को ही जारी किया गया था और शिविर के पीछे वाले गेट पर चस्पा किया गया। इस लिहाज से 24 घंटे से ज्यादा का समय बीत गया है। अब मेला प्रशासन कभी भी शंकराचार्य के खिलाफ कोई भी आदेश पारित कर सकता है।
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