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इलाहाबाद विवि की एलएलबी, बीएलएलबी की प्रवेश परीक्षा पर रोक

Mon, 06 Jun 2016 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एलएलबी तीन वर्षीय और बीएएलएलबी पांच वर्षीय पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं पर रोक लगा दी गई है। एलएलबी पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में रविवार को एडमिशन कोर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बार कौंसिल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आने के बाद प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परास्नातक, शोध समेत अन्य पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होंगी।
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विश्वविद्यालय की एलएलबी, बीएलएलबी के साथ अन्य पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं 18 और 19 जून को संभावित हैं, लेकिन एलएलबी की मान्यता पर ही सवाल उठ गया है। विश्वविद्यालय के इस कोर्स को बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता ही नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 2010 से मान्यता ही नहीं ली गई है। इसकी वजह से इस दौरान एलएलबी करने वाले छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में चला गया है। एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अफसरों को फटकार लगाई और कुलपति को निर्देश दिया कि बार कौंसिल से कोर्स की अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी की जाए। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि बार कौंसिल की अनुमति मिलने तक एलएलबी में प्रवेश न लिया जाए। न्यायालय के इस आदेश के परिप्रेक्ष्य में एडमिशन कोर कमेटी की बैठक में एलएलबी और बीएलएलबी की प्रवेश परीक्षाओं पर रोक लगा दी गई।

विधि विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर आरके चौबे का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के बाद कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई और उसमें प्रवेश की प्रक्रिया रोकने का निर्णय लिया। बताया कि मान्यता के लिए बार कौंसिल को रिमांइडर भेजा गया है। वहां से जवाब आने के बाद प्रवेश परीक्षा की तिथि घोषित करने के साथ आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। बताया कि दोनों पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थी ही नई तिथि को होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होंगे। एलएलएम कोर्स के लिए बार कौंसिल की मान्यता की जरूरत नहीं होती। इसलिए एलएलएम की प्रवेश परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी। बैठक में प्रोफेसर आरके चौबे के अलावा प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर बीएन सिंह, डीन लॉ प्रोफेसर राकेश खन्ना आदि मौजूद रहे।
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इविवि की एलएलबी के साथ बीएलएलबी पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स को भी बार कौंसिल की मान्यता नहीं है। विश्वविद्यालय में यह कोर्स 2005 में शुरू हुआ, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि 2008 से ही इस पाठ्यक्रम के लिए बार कौंसिल से मान्यता नहीं ली गई है। इसकी वजह से इस दौरान बीएएलएलबी करने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में चला गया है। हालांकि, विभाग के अध्यापक तथा अफसर इस बारे में कुछ बोलने से कतरा रहे हैं लेकिन एलएलबी के साथ बीएएलएलबी की प्रवेश परीक्षा पर भी रोक लगा दी गई है।

इविवि में एलएलबी की 493 सीट हैं। इसके अलावा सीएमपी और इलाहाबाद डिग्री कालेज में भी एलएलबी की पढ़ाई होती है। इसके लिए 14376 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया है। विश्वविद्यालय में संचालित बीएएलएलबी की 123 सीट के लिए 4151 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है। 
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