इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बुधवार को दिन भर विरोध-प्रदर्शन और लुका-छुपी का खेल चला। अन्य पदाधिकारियों तथा छात्र नेताओं के विरोध के चलते छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह की पहले प्रस्तावित गोष्ठी यूनियन भवन में भी नहीं हो पाई। भवन पर अन्य पदाधिकारियों तथा एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने पहले ही कब्जा जमा लिया था। हालांकि इस विरोध प्रदर्शन के बीच स्वराज विद्यापीठ में गोष्ठी हुई और वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन ने संबोधित किया।
इसके बाद ऋचा तथा अन्य छात्रों के साथ वह कुलपति से मिलने भी पहुंचे जहां उनका तीव्र विरोध हुआ। इसकी वजह से पुलिस की सुरक्षा में उन्हें परिसर से बाहर निकाला गया। इन घटनाक्रमों के बीच परिसर में दिन भर तनाव और टकराव की आशंका बनी रही। इसकी वजह से वहां भारी फोर्स तैनात रही।
छात्रसंघ अध्यक्ष की ओर से सीनेट हाल में प्रस्तावित गोष्ठी विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार शाम को रद्द कर दी थी। इसके बाद ऋचा ने छात्रसंघ भवन में गोष्ठी की घोषणा की थी। कार्यक्रम 12 बजे प्रस्तावित था, लेकिन कार्यक्रम तथा बतौर मुख्य वक्ता आमंत्रित सिद्धार्थ वरदराजन का विरोध कर रहे अन्य पदाधिकारी, एबीवीपी के कार्यकर्ता, छात्र नेता रजनीश सिंह ऋषू आदि पहले ही वहां पहुंच गए। छात्रसंघ पदाधिकारियों ने पहले भवन में ताला जड़ दिया। तकरीबन 11.30 बजे उन्होंने छात्रसंघ भवन में कार्यक्रम शुरू कर दिया। छात्रसंघ पदाधिकारियों का कहना था कि छात्रसंघ भवन में गोष्ठी के लिए उन्होंने 16 जनवरी को ही डीएसडब्ल्यू से अनुमति ली थी। जबकि, डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर एसके शर्मा का कहना था कि उन्होंने किसी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी।
विश्वविद्यालय प्रशासन तथा पुलिस के अफसरों के मना करने के बावजूद छात्रसंघ भवन में कार्यक्रम जारी रहा। उसी दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा ने भी छात्रसंघ भवन के सामने हैदराबाद में छात्र के आत्महत्या के विरोध में जुलूस निकाल रहे विद्यार्थियों को संबोधित किया। इससे वहां तनाव ज्यादा बढ़ गया था। हालांकि भारी फोर्स रहने की वजह से बवाल बढ़ा नहीं। ऋचा का कहना था कि गतिरोध को देखते हुए वह पीछे हटने के लिए तैयार हो गईं, लेकिन अन्य पदाधिकारियों ने पूरी फोर्स की मौजूदगी में छात्रसंघ भवन में कार्यक्रम किया। इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।इस गतिरोध के बीच ऋचा सिंह की ओर से दिन में 2.30 बजे स्वराज विद्यापीठ में गोष्ठी की घोषणा की गई। वहां सिद्धार्थ वरदराजन ने विद्यार्थियों को संबोधित किया, लेकिन इसके तकरीबन एक घंटा बाद वरदराजन ऋचा के साथ कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हंगलू से मिलने के लिए उनके ऑफिस में पहुंचे। इसकी जानकारी होने पर छात्र नेता रजनीश सिंह, छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू, सांस्कृतिक मंत्री जितेंद्र शुक्ला, अभय प्रताप सिंह, यज्ञ द्विवेदी, पंकज यादव के नेतृत्व में पहुंचे छात्रों ने उनका विरोध शुरू कर दिया।
रजनीश का कहना था कि जब कार्यक्रम रद्द हो गया था तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने वरदराजन को परिसर में प्रवेश क्यों करने दिया। विक्रांत का कहना था कि यदि उन्हें कुलपति से मिलना ही था तो दूसरे दिन आ जाते। इस विरोध प्रदर्शन के बीच पहुंचे छात्र नेता राणा यशवंत प्रताप सिंह ने वरदराजन को तत्काल परिसर से बाहर निकलवाने की मांग की। इसके बाद उन्हें पुलिस की गाड़ी से बाहर किया गया। महामंत्री सिद्धार्थ सिंह ने वरदराजन का कार्यक्रम परिसर में न हो पाने को आम छात्रों की जीत बताई। इसके विपरीत ऋचा ने भी पहले स्वराज विद्यापीठ में गोष्ठी फिर कुलपति से मुलाकात को छात्रों की जीत बताई।
एनएसयूआई की बैठक में सिद्धार्थ वरदराजन का कार्यक्रम स्थगित करने की निंदा की गई। छात्रों का कहना था कि यह लोकतंत्र के खिलाफ है। बैठक में अनुराग राय, गौरव त्रिपाठी, हरिनाम सिंह, अनिल सिंह, अनुराग पाल आदि मौजूद रहे। छात्र नेता विवेकानंद त्रिपाठी ने वरदराजन का कार्यक्रम स्थगित होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। विवेकानंद का कहना था कि परिसर में सभी विचारधारा के लोगों का स्वागत होना चाहिए। एसएफआई की बैठक में भी गोष्ठी रद्द करने की निंदा की गई। छात्रों में एबीवीपी की ओर से छात्रसंघ भवन में कार्यक्रम कराने को लेकर भी नाराजगी रही। बैठक में फिरोज, रत्नेश, जय प्रकाश, सूर्य प्रकाश, अंकित दुबे आदि मौजूद रहे।
‘परिसर में पूरी तरह से शांति रही। चीफ प्रॉक्टर, डीएसडब्ल्यू, प्रोफेसर हर्ष कुमार, सुरक्षा अधिकारी तथा अन्य सभी के प्रयास से यह संभव हुआ। ऋचा ने वरदराजन का कार्यक्रम तय किया था। आगे से इस तरह का गतिरोध न होने पाए इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। छात्रसंघ अध्यक्ष के साथ वरदराजन मिलने आए थे, लेकिन थोड़ी देर में ही वह चले गए। यह औपचारिक मुलाकात थी।’प्रोफेसर रतनलाल हंगलू, कुलपति, इविवि
विश्वविद्यालय में लंबे अंतराल के बाद प्रॉक्टोरियल बोर्ड के ज्यादातर सदस्य एक साथ दिखाई दिए। परिसर में गतिरोध को देखते हुए मंगलवार को ही सभी को प्रॉक्टर ऑफिसर में पहुंचने के लिए कह दिया गया था। बुधवार को कुलपति के साथ बैठक के बाद सभी शिक्षक एक साथ छात्रसंघ भवन पहुंचे। विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर इसका प्रभाव भी दिखा।