माफिया से राजनीतिज्ञ बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस की मौजूदगी में हत्या की सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने लेटर पिटिशन दायर की है।
माफिया से राजनीतिज्ञ बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस की मौजूदगी में हत्या की सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने लेटर पिटिशन दायर की है। ठाकुर ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता के 16 अप्रैल के प्रतिनिधित्व का संज्ञान लेने के लिए संबंधित उत्तरदाताओं को निर्देश देने की अपील की गई है।
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साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को 15 अप्रैल की रात अतीक अहमद और भाई अशरफ के हत्यारोपी लवलेश तिवारी, सन्नी सिंह और अरुण मौर्या के खिलाफ एफआईआर को सीबीआई को स्थानांतरित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत को बताया कि इस मामले में समय की बहुत अहमियत है क्योंकि न्यायिक हिरासत में तीन अभियुक्तों के मारे जाने की संभावना है और इससे पूरा सच हमेशा के लिए दफन हो जाएगा। इसलिए इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
याचिका में कहा गया है कि बार-बार की याचिकाओं के बावजूद, यूपी राज्य की ओर से कुछ भी नहीं किया गया है। इन सब कारणों से ऐसी परिस्थितियों में कोई भी आधिकारिक और प्रभावी वैकल्पिक उपाय न होने के कारण मामले के महत्व को देखते हुए यह रिट याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की जा रही है। याचिकाकर्ता ठाकुर ने सवाल उठाया कि इतनी कथित उच्च सुरक्षा में ऐसी घटना कैसे हो सकती है?
इस दौरान सुरक्षा में ढील क्यों दिखाई दी? मीडियाकर्मियों को पुलिस हिरासत में पुरुषों से बातचीत करने की अनुमति क्यों दी गई? याचिका में कहा गया है कि अतीक अहमद की हत्या को देखकर पूरा घटनाक्रम काफी संदिग्ध और संदेहास्पद लगता है। काफी हद तक स्पष्ट है कि पूरी हत्या योजना के राज्य प्रायोजित कवायद होने की काफी संभावना हो सकती है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की निगरानी में मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।