माफिया अतीक व अशरफ की हत्या से फैली दहशत का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी देखने को मिला। मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन), तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) व जिला महिला चिकित्सालय (डफरिन) में सोमवार को सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या काफी कम रही।
माफिया अतीक व अशरफ की हत्या से फैली दहशत का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी देखने को मिला। मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन), तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) व जिला महिला चिकित्सालय (डफरिन) में सोमवार को सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या काफी कम रही। आम तौर पर सप्ताह का पहला दिन होने के कारण सोमवार को कॉल्विन में लगभग 1500, बेली 1500 व डफरिन में 500 मरीजों की ओपीडी होती है। मगर हत्या के तीसरे दिन बेली में 500, कॉल्विन 425 व डफरिन में 116 मरीजों का ही रजिस्ट्रेशन हुआ।
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एक तरफ जहां इन अस्पतालों में प्रतिदिन सुबह 9 बजे से ही मरीजों की लंबी कतार नजर आती है। वहीं भय के इस माहौल में सुबह करीब 11 बजे तक इन अस्पतालों में 100 से 150 मरीज ही नजर आ रहे थे। दिन चढ़ने के बावजूद मरीजों की संख्या सीमित बनी रही। इंटरनेट सेवा उपलब्ध न होने के कारण अस्पताल प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन के लिए एप व्यवस्था के उपयोग की पुरानी व्यवस्था लागू की।
इसके तहत मरीज कतारबद्ध होकर काउंटर से अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते थे। मगर इन सबके बावजूद मरीजों की संख्या काफी सीमित रही। वहीं जिन नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ, उसमें अधिकतर सांस के रोगी और प्रसव के मामले ही थे। मरीजों ने अधिक आवश्यकता होने पर ही अस्पताल पहुंचना उचित समझा। बाकी अन्य मरीजों ने फोन द्वारा ही डॉक्टरों से संपर्क किया।
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आम दिनों की अपेक्षा सोमवार को मरीजों की संख्या काफी कम थी। अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीजों को समस्या न हो, इसलिए रजिस्ट्रेशन की पुरानी नीति को ही लागू किया गया था। - डॉ. राजेश कुमार, कॉल्विन अस्पताल
सप्ताह के पहले दिन होने के कारण सोमवार को मरीजों की संख्या 1500 के आसपास होती है, मगर इस बार मरीजों की संख्या आम दिनों के मुताबिक काफी कम रही। - डॉ. एमके अखौरी, प्रभारी एसआईसी, बेली अस्पताल