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Ateeq Ahmed News: चार और मुकदमों में पूर्व सांसद अतीक अहमद की जमानत निरस्त

Tue, 20 Oct 2020 11:36 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इन मामलों में निरस्त हुईं जमानतें
 
  1. धूमनगंज थाने में दर्ज राजूपाल हत्याकांड के गवाह को धमकी देने और अपने पक्ष में बयान करा लिए जाने का मुकदमा 2009 में दर्ज कराया गया था। जबकि घटना 1 मार्च 2006 की बताई गई थी। इस मामले में अतीक अहमद को 29 मई 2009 को जमानत  मिली थी। 
  2. थाना धूमनगंज में ही वादी अशरफ ने दो जुलाई 2001 को अतीक सहित चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था कि उसके पड़ोसी अतीक अहमद और उसके लोग उससे बीजेपी छोड़ देने के लिए धमकी दे रहे थे। घटना के दिन उस पर जानलेवा हमला किया था। इस प्रकरण में अतीक अहमद को 20 जुलाई 2001 को जमानत मिली थी। 
  3. खुल्दाबाद थाने में नसीम अहमद उर्फ नस्सन हत्याकांड का मुकदमा अतीक और अन्य लोगों पर दर्ज। वादी मोहम्मद तुफैल उर्फ गुड्डू ने 19 अक्टूबर 2002 दर्ज कराया था कि उसके बहनोई नसीम अहमद की हत्या कर दी गई और उस पर जानलेवा हमला किया गया था। इस प्रकरण में 26 जुलाई 2003 को अतीक अहमद को जमानत मिली थी। 
  4. सात अगस्त 2002 को जेल से अतीक अहमद को पेशी पर कचहरी लाया गया था। जिला न्यायालय की बहुमंजिला इमारत के पास पहुंचने पर अतीक पर बम से हमला किया गया था। घटना के दौरान ही पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया था। विवेचना में पता चला कि अतीक ने साजिश से खुद ही हमला कराया था।  इस मामले में 25 जुलाई 2003 को अतीक अहमद को जमानत मिली थी।
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अतीक अहमद (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए ने सोमवार को चार और आपराधिक मुकदमों में अतीक अहमद को पूर्व में मिली जमानत निरस्त कर दी है। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास गवाहों को धमकाने और कचहरी  परिसर में पेशी के दौरान बम हमला करवाने का मुकदमा शामिल है। इससे पूर्व गवाह को धमकाने के एक मामले में अतीक की जमानत स्पेशल कोर्ट से निरस्त हो चुकी है।
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इस प्रकार से अभियोजन कुल पांच मुकदमों में जमानतें निरस्त कराने में कामयाब रहा है। सभी प्रकरण में अतीक अहमद को पूर्व में  जमानत मिली थी। अभियोजन द्वारा अतीक के जमानत निरस्त करने की अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई हुई थी। जमानत निरस्तीकरण अर्जी पर यह आदेश स्पेशल जज डॉ बालमुकुंद ने डीजीसी जीसी अग्रहरी, विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र सिंह और एडीजीसी राजेश गुप्ता को सुन कर दिया है। 

पूर्व डीजीसी राम अभिलाष सिंह ने अतीक अहमद के खिलाफ कर्नलगंज, करेली, धूमनगंज और खुल्दाबाद थानों में दर्ज पांच मुकदमों जिसमें अतीक अहमद को पूर्व में जमानत मिली चुकी थी, के संबंध में मार्च 2017 को जमानत निरस्त करने की अर्जी प्रस्तुत की थी। वर्तमान में जमानत निरस्त करने के संबंध में दाखिल सभी प्रार्थना पत्र स्पेशल जज एमपी एमएलए कोर्ट में लंबित हैं। 
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शुक्रवार को जमानत निरस्त करने के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई हुई थी। जिसमें करेली थाने के मुकदमे में आदेश घोषित कर दिया था। शेष चार  मामलों में सोमवार को आदेश घोषित किया गया है। अभियोजन की ओर से कहा गया कि अभियुक्त अतीक अहमद के खिलाफ 2017 तक कुल 75 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे।  पुलिस रिपोर्ट के अनुसार जमानत पाने के बाद अतीक अहमद आपराधिक गतिविधियों में संलग्न रहे। अभियोजन का कहना था कि अतीक अहमद ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने जमानत पर रहने के दौरान नैनी स्थित शुआट्स में घुसकर मारपीट की। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कड़ी टिप्पणियां की थीं। 

कोर्ट ने विधि व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए चारों प्रकरणों में अभियोजन की अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा है कि अभियुक्त का पक्ष रखने कोई उपस्थित नहीं हुआ जबकि, उन्हें कई बार अवसर दिया जा चुका है। 
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