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अतीक अहमद का खेल : ट्रायल पूरा ना हो इसके लिए किए हर जतन, कोर्ट में एक के बाद एक देते रहे अर्जी

Tue, 28 Mar 2023 06:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

101 मुकदमों में नामजद माफिया अतीक अहमद को अब तक किसी मामले में सजा नहीं हो सकी तो यह यूं ही नहीं। दरअसल जरायम की दुनिया में बादशाहत कायम करते-करते अतीक कानूनी दांवपेचों से भी बखूबी वाकिफ हो गया था।
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Prayagraj News : अतीक अहमद। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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101 मुकदमों में नामजद माफिया अतीक अहमद को अब तक किसी मामले में सजा नहीं हो सकी तो यह यूं ही नहीं। दरअसल जरायम की दुनिया में बादशाहत कायम करते-करते अतीक कानूनी दांवपेचों से भी बखूबी वाकिफ हो गया था। इन्हीं दांवपेचों का सहारा लेकर वह कानून के शिकंजे से अब तक बचता रहा। पहले विवेचक से सेटिंग की और अगर बात नहीं बनी तो इस बात के हर जतन किए कि मुकदमों का ट्रायल पूरा ना हो सके। कोर्ट में एक के बाद एक अर्जियां लगाता रहा और लुकाछुपी का खेल खेलता रहा।

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बात 1996 से करें तो अतीक अहमद पर अब तक दर्ज लगभग 50 मुकदमे अभी ट्रायल पर हैं। इन मामलों में कोर्ट में सुनवाई चल रही है। अभियोजन अधिकारियों के मुताबिक लगभग 12 मुकदमे ऐसे रहे जिनके ट्रायल में देरी कराने के लिए अतीक अहमद के अधिवक्तागणों की ओर से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए गए थे। इसके चलते आरोप तय नहीं किए जा सके थे। इसे देखते हुए एडीजी अभियोजन आशुतोष पांडेय के निर्देशन में अपर निदेशक अभियोजन प्रयागराज परीक्षेत्र राजेश कुमार श्रीवास्तव ने प्रभावी कदम उठाए।

अभियोजन अधिकारियों के साथ बैठक कर इन प्रकरणों की समीक्षा की और आरोप विरचित कराए जाने के लिए दिशा निर्देश दिए। इसका ही परिणाम रहा कि कई प्रकरणों में प्रभावी कार्यवाही करते हुए आरोप विरचित कराए गए। इसमें अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार वैश्य, विशेष लोक अभियोजक एवं अभियोजन अधिकारी विनोद कुमार गुप्ता, जनपदीय नोडल अधिकारी संजय कुमार सिंह आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संयुक्त निदेशक अभियोजन विश्वनाथ त्रिपाठी का कहना है कि बचाव पक्ष की ओर से ट्रायल को निलंबित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद भी अभियोजन की ओर से प्रबल और प्रभावी पैरवी की जा रही है। निकट भविष्य में भी अतीक अहमद और उसके सहयोगियों से संबंधित तीन मुकदमों में अभियोजन की सफलता की प्रबल संभावना है।

प्रभावी पैरवी हुई तो दो अन्य मुकदमों में मुकाम तक पहुंचेगा माफिया

उमेश पाल अपहरण केस मैं फैसले की घड़ी नजदीक आ गई है और अब सबको 28 मार्च को इंतजार है। माफिया पर दर्ज कुल 101 मुकदमों वैसे यह पहला मामला है जो सुनवाई पूरी होने के बाद फैसले तक आ गया है। अभी 50 से ज्यादा मामलों का ट्रायल चल रहा है। हालांकि जानकारों का कहना है कि अगर प्रभावी पैरवी हुई तो प्रयागराज में दर्ज दो अन्य मामले ऐसे हैं, जिनमें माफिया को उसके मुकाम तक पहुंचाया जा सकता है। इनमें से तीन मुकदमें प्रयागराज जबकि एक लखनऊ का है।

जैद खालिद अपहरण कांड

जिन चार मुकदमों में अतीक अहमद और उसके गुर्गों के जुल्म का शिकार पीड़ितो को इंसाफ जल्द मिल सकता है, उनमें से एक प्रॉपर्टी डीलर जैद खालिद अपहरण कांड है। आरोप है कि 22 नवंबर 2018 को अपने गुर्गों के जरिए अतीक अहमद ने उसे अगवा कर देवरिया जेल में बुलाया था और फिर जमकर पिटाई की थी। सोने का ब्रेसलेट भी लूट लिया था और जान से मारने की धमकी भी दी थी। जनवरी 2019 में इस मामले में धूमनगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

कुछ दिनों बाद एक ऑडियो की वायरल हुआ था, जिसमें अतीक अहमद और जैद की बातचीत थी। कथित तौर पर यह बात सामने आई कि साबरमती जेल में बंद रहने के दौरान ही अतीक ने फोन से जैद से बात की थी। इस मामले में वादी की गवाही हो चुकी है और अब मुकदमा बहस की ओर अग्रसर है। माना जा रहा है कि अगर प्रभावी ढंग से पैरवी हुई तो इस मामले में पीड़ित को इंसाफ दिलाया जा सकता है।

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जितेंद्र पटेल हत्याकांड

11 जुलाई 2016 को धूमनगंज के इंडियन ऑयल डिपो के पास किसान नेता जितेंद्र पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पहले उमेश पाल व उसके भाई समेत अन्य को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में उमेश पाल को कोर्ट से अरेस्ट स्टे मिल गया था। बाद में इस मामले की अग्रिम विवेचना कराई गई जिसमें पता चला कि घटना को अतीक अहमद के इशारे पर अंजाम दिया गया।

जिसके बाद नामजद आरोपियों को क्लीन चिट देकर अतीक समेत अन्य को आरोपी बनाया गया। जिनमें अतीक का सबसे खास शूटर तोता और अकरम व आसिफ उर्फ दुर्रानी शामिल थे। अतीक का भाई अशरफ भी इस मामले में आरोपी है। इस मामले में भी गवाही का सिलसिला चल रहा है। माना जा रहा है कि अभियोजन की ओर से प्रभावी ढंग से पैरवी की गई तो इस मामले में भी आरोपियों को सजा दिलवाई जा सकती है।

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