तारामंडल के निदेशक डॉ. रवि किरन बताते हैं कि उल्कापिंडों का यह समूह पृथ्वी से करीब 100 किमी ऊपर से गुजरेगा। यह उल्कापिंड रात 12 बजे पूर्व की दिशा से आता दिखाई देगा। इस समूह में 60 से 100 तक उल्कापिंड हो सकते हैं। उल्कापिंडों की रफ्तार 60 किमी प्रति सेकेंड रहने का अनुमान है। इनकी आकृति लंबी चमकदार चीज सरीखी होगी।
दशहरे या उससे एक दिन पहले आसमान पर एक शानदार नजारा देखने को मिलने जा रहा है। 21 या 22 अक्तूबर को रात 12 बजे से सुबह छह बजे के बीच उल्कापिंडों का एक समूह धरती के एकदम करीब से गुजरने वाला है। यह कुछ उसी तरह दिखेगा, जैसे कोई टूटता हुआ तारा। खास बात यह है कि इसे देखने के लिए किसी दूरबीन की जरूरत नहीं होगी।
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तारामंडल के निदेशक डॉ. रवि किरन बताते हैं कि उल्कापिंडों का यह समूह पृथ्वी से करीब 100 किमी ऊपर से गुजरेगा। यह उल्कापिंड रात 12 बजे पूर्व की दिशा से आता दिखाई देगा। इस समूह में 60 से 100 तक उल्कापिंड हो सकते हैं। उल्कापिंडों की रफ्तार 60 किमी प्रति सेकेंड रहने का अनुमान है। इनकी आकृति लंबी चमकदार चीज सरीखी होगी।
दरअसल, सौर मंडल के ग्रहों के बीच अंतरिक्ष में पत्थर और लोहे के अनगिनत छोटे-छोटे कण मौजूद हैं। रफ्तार से घूम रहे ऐसे कण जब पृथ्वी के वायु मंडल में आकर टकराते हैं तो तेज चमक पैदा होती है। इसे बगैर किसी दूरबीन के सामान्य तौर पर देखा जा सकता है।
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किसी को नहीं पहुंचाएंगे नुकसान
इन उल्कापिंडों को तभी देखा जा सकता है, जबकि आसमान साफ हो। बादल होने पर इन्हें देख पाना संभव नहीं होगा। मौसम विभाग के अनुसार 21 और 22 अक्तूबर को आसमान साफ रहेगा। डॉ. रवि किरन बताते हैं कि ऐसे उल्कापिंड हर साल अक्तूबर में ही दिखाई देते हैं। इनसे किसी को कोई हानि नहीं होगी क्योंकि ये धरती पर नहीं गिरेंगे।