prayagraj news : इलाहाबाद विश्वविद्यालय।
- फोटो : prayagraj
महिला का आरोप है कि जेएनयू में पढ़ाई के दौरान डॉ. विक्रम ने उससे शादी की थी। दोनों के बीच एक पुत्र है, लेकिन डॉ. विक्रम ने उसे छोड़ दिया और अब पुत्र की देखभाल से पीछे हट रहे हैं। पूर्व में यह महिला कुलपति के घर तक पहुंच गई थी और वहां जाकर डॉ. विक्रम की शिकायत की। इसके बाद महिला ने कुलपति कार्यालय एवं रजिस्ट्रार दफ्तर में जाकर हंगामा किया और अब विभाग तक पहुंच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने डॉ. विक्रम को नोटिस जारी कर इन तमाम घटनाओं का जिक्र करते हुए स्पष्टीकरण तलब कर लिया।
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उधर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सीकैश (यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए गठित कमेटी) की चेयरपर्सन प्रो. चंदा देवी ने भी डॉ. विक्रम को नोटिस जारी कर विभिन्न बिंदुओं पर 15 दिनों में जवाब मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि क्या आपका विवाह 22 वर्ष पूर्व हुआ था? क्या वह महिला आपकी पत्नी है? क्या आप दोनों के बीच कोई पुत्र है? क्या आपने महिला का परित्याग किया है? महिला का आरोप है कि आपकी तीन अन्य पत्नियां हैं, क्या यह सही है। इस बारे में डॉ. विक्रम का कहना है कि उन्होंने जवाब सौंप दिया है। कुछ छात्र और विभाग के शिक्षक उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। डॉ. विक्रम ने खुद की जान को खतरा बताते हुए कुलपति से सुरक्षा की गुहार लगाई है।
असिस्टेंट प्रोफेसर ने भेजा जवाब
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम को इस मामले में 18 मई सात जुलाई तक चार नोटिस मिल चुके हैं। डॉ. विक्रम ने रजिस्ट्रार को अपना जवाब भेज दिया है। डॉ. विक्रम ने बताया कि महिला उनकी विधिक पत्नी नहीं है, क्योंकि वह पहले से ही शादीशुदा है और एक बच्चे की मां है। महिला का पति बिहार के हाजीपुर का रहने वाला है। इनका बेटा भी शादीशुदा है। महिला ने यह बात डॉ. विक्रम से छिपाई। इसी वजह से डॉ. विक्रम ने हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत तीस हजारी कोर्ट दिल्ली में विवाह को ‘नल एंड वाइड’ घोषित करने के लिए केस दाखिल किया था, जो अभी पेंडिंग है और जिसकी सुनवाई 30 जुलाई को होनी है।
महिला ने डॉ. विक्रम पर कोर्ट में मुकदमा किया था, जो वह जीत चुके हैं। कोर्ट के ऑर्डर पर डॉ. विक्रम उस महिला को मेंटेनेंस भी देते हैं, जबकि महिला बिहार में टोला सेवक के पद पर तैनात है। डॉ. विक्रम के अनुसार महिला ने चार लड़कों पर छेड़खानी और दुष्कर्म का झूठा मुकदमा पटियाला कोर्ट और जेएनयू जीएसकैश में दर्ज कराया था। दोनों ही जगह से वह मुकदमा हार चुकी है। डॉ. विक्रम ने महिला पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए एसएसपी, महिला थाना, कर्नलगंज थाना, कैंट थाना में शिकायती पत्र दिया है, ताकि उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सके।
दोनों नोटिस में महिला के नाम अलग-अलग
रजिस्ट्रार और सीकैश की चेयरपर्सन की ओर से डॉ. विक्रम को अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं और दोनों नोटिस में महिला के नाम में भिन्नता है। दोनों में महिला के नाम अलग-अलग हैं।
‘एक महिला द्वारा दो बार विश्वविद्यालय में आकर डॉ. विक्रम की शिकायत की गई थी। इसी शिकायत के आधार पर उनका नोटिस दिया गया है।’ डॉ. जया कपूर, पीआरओ, इविवि