प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में चार साल बाद भी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। काउंसलिंग के बाद भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कॉलेज आवंटन के लिए भटक रहे हैं। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर शिक्षाशास्त्र के चयनित अभ्यर्थी एक माह से काउंसलिंग शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। यह हालत तब है, जब पिछले दिनों मुख्य मंत्री ने निर्देश जारी किए थे कि भर्ती के विज्ञापन से लेकर नियुक्ति प्रक्रिया छह माह में पूरी कर ली जाए।
अशासकीय महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 47 के तहत 35 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1150 पदों पर भर्ती होनी थी। विज्ञापन वर्ष 2016 में जारी किया गया था। इनमें से 34 विषयों का अंतिम चयन परिणाम आ चुका है और काउंसलिंग कराकर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी दिए जा चुके हैं, लेकिन ज्यादातर विषयों में कई चयनित अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के बाद भी नियुक्ति नहीं मिल सकी है।
दरअसल, सीटें खाली न होने के कारण इन अभ्यर्थियों को कॉलेज आवंटित नहीं किए जा सके। उच्च शिक्षा निदेशालय के सूत्रों का कहना है कि ऐसे अभ्यर्थियों को कॉलेज आवंटन की प्रक्रिया निदेशालय में शुरू की गई है। लेकिन, तमाम कर्मचारियों के पटल बदल दिए जाने से प्रक्रिया को पूरा करने में विलंब हो रहा है।
वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर शिक्षाशास्त्र के 100 पदों पर चयनित अभ्यर्थी काउंसलिंग कराकर कॉलेज आवंटित किए जाने की मांग को लेकर उच्च शिक्षा निदेशालय में कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की ओर से उनके चयन से संबंधित फाइलें 12 नवंबर को उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजी जा चुकी हैं, लेकिन निदेशालय ने अब तक काउंसलिंग का कार्यक्रम भी जारी नहीं किया। निदेशालय में वेटिंग लिस्ट वालों को कॉलेज आवंटन की प्रक्रिया चल रही है, जबकि पहले मुख्य सूची में शामिल अभ्यर्थियों की काउंसलिंग कराकर नियुक्ति पत्र दिए जाने चाहिए। अभ्यर्थियों का कहना है कि काउंसलिंग जल्द शुरू नहीं कराई गई तो निदेशालय में फिर धरना-प्रदर्शन होगा।