परीक्षार्थियों के अंक न बताए जाने को लेकर विवाद
संशोधित परिणाम के बाद भी आधे से अधिक पद खाली
प्रयागराज, 28 सितंबर। अर्थ एवं संख्या प्रभाग में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पदों पर भर्ती का संशोधित चयन परिणाम भी सवालों के घेरे में है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने अभ्यर्थियों का न तो उनके अंक बताए और न ही कंप्यूटर प्रमाणपत्रों को अवैध ठहराए जाने से संबंधित जानकारी दी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग की ओर से जारी किया गया संशोधित परिणाम, पहले जारी परिणाम से भी अधिक विवादित है।
गौरतलब है कि आयोग ने सात सितंबर को सहायक सांख्यिकी अधिकारी के 373 पदों पर भर्ती के लिए रिजल्ट जारी किया था। आयोग को केवल 116 पदों के लिए योग्य अभ्यर्थी मिले थे और बाकी पद खाली रह गए थे। अभ्यर्थियों ने इसकी शिकायत आयोग अध्यक्ष से की थी और उन्होंने परिणाम की समीक्षा कराई। इसके बाद 26 नए अभ्यर्थियों को चयन के लिए योग्य पाया गया और आयोग ने 142 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन करते हुए संशोधित परिणाम जारी किया लेकिन अब इसको लेकर विवाद शुरू हो गया है। संशोधित रिजल्ट के बाद भी आधे से अधिक पद खाली हैं।
आयोग ने अंतिम चयन परिणाम में सभी वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन अनारक्षित श्रेणी में कर दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले परिणाम में आयोग की ओर से यह बताया गया था कि ओबीसी और एससी-एसटी परीक्षार्थियों का चयन उन्हीं की श्रेणी में हुआ था। आयोग ने अंकों के बारे में भी किसी परीक्षार्थी को कोई जानकारी नहीं दी है। आयोग ने यह परीक्षा परिणाम उस समय जारी किया है, जब इसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए याचिका दाखिल है। अभ्यर्थियों ने आयोग अध्यक्ष से मांग की है कि परिणाम की फिर से समीक्षा कराई जाए ताकि चयन से वंचित हुए योग्य अभ्यर्थियों को राहत मिले सके।