अशरफ, उसकी पत्नी जैनब और साले सद्दाम की तिकड़ी ने वसूली का एक अलग गैंग भी बना लिया था। अशरफ की वसूली अतीक की वसूली से एकदम अलग थी। अशरफ के ससुराल वालों की वसूली से अतीक गैंग में कई बार झगड़ा भी हो गया था लेकिन भाई के प्रेम में अतीक ने अपने ही गुर्गों को शांत करा दिया था। वसूली का यह खेल अतीक और अशरफ की हत्या तक चलता रहा। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि जैनब और उसके मायकों वालों ने किन लोगों के नाम पर कितनी संपत्ति अर्जित की।
अशरफ और उसकी पत्नी जैनब शादी के कुछ महीनों बाद से अतीक के चकिया स्थित घर से चले गए थे। जैनब पूरामुफ्ती के सल्लाहपुर स्थित अपने मायके चली गई थी। अशरफ भी अधिकांश वहीं रहता था। यूं तो अशरफ अपने भाई अतीक से अलग नहीं हुआ था लेकिन उसने गिरोह से अलग अपनी वसूली शुरू कर दी थी।
सल्लाहपुर में उसने अपना आलीशान मकान बनवाया था। साला सद्दाम ही प्रदेश के कई बिल्डरों, उद्योगपतियों और बड़े दुकानदारों से वसूली करता था। इसके अलावा प्रदेश भर में विवादित जमीनों को खाली कराने के लिए अशरफ मोटा पैसा लेता था। कई बार ऐसा हुआ कि अतीक के गुर्गों और सद्दाम के बीच वसूली को लेकर विवाद हो गया।
हालांकि, अतीक ने हर बार बीच में आकर अशरफ का ही साथ दिया। उसने साफ कह दिया था कि अशरफ के काम में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। अशरफ के पकड़े जाने के बाद गैंग की कमान जैनब ने संभाल ली थी। वसूली का पूरा हिसाब किताब वही रखती थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अशरफ, जैनब और सद्दाम की तिकड़ी ने कुछ ही सालों में करोड़ों की वसूली कर ली।