गुर्गों के नाम से खरीदीं महंगी गाड़ियां-जमीनें
पुलिस सूत्रों का कहना है कि अपराध से अर्जित संपत्ति की खोजबीन के क्रम में यह बात भी सामने आई है कि अशरफ के जेल जाने के बाद से उसके धंधों की कमान सद्दाम ने संभाल ली थी। इससे मिलने वाले रुपयों को वह ही ठिकाने लगाता था। पुख्ता सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को पता चला है कि सद्दाम ने पूरामुफ्ती, धूमनगंज, कैंट समेत शहर के कुछ इलाकों में रहने वाले अपने बेहद करीबियों के नाम पर अशरफ के पैसों से जमीनें व महंगी गाड़ियां खरीदी हैं। इन सभी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही इनके खिलाफ भी अपराध से अर्जित संपत्ति के मामले में कार्रवाई की जाएगी।
आतिन की भी संपत्ति की तलाश
गैंगस्टर के मामले में कुल 11 लोगों में से सद्दाम के अलावा प्रयागराज का एक और नाम शामिल है। खुल्दाबाद निवासी और वर्तमान में रामपुर जेल में बंद आतिन जफर भी सद्दाम के गैंग का सदस्य है और उसकी भी अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाया जा रहा है। अतीक-अशरफ की हत्या के बाद शाइस्ता व शूटर साबिर उसके घर भी पहुंचे थे और आरोप है कि उसने उन्हें फरार होने में भी मदद की थी। हत्याकांड से पहले लखनऊ में अतीक के बेटे असद के साथ ही फ्लैट में रहता था।
गैंग के सदस्य
गैंग लीडर सद्दाम उर्फ अब्दुल समद निवासी हटवा प्रयागराज, जेल वार्डर मनोज कुमार गौड़ निवासी अशरफ खां छावनी (मूल निवासी गांव कसली, थाना मईल, जिला देवरिया) और शिवहरी अवस्थी गणेश नगर (मूल निवासी गांव कछलिया, थाना पाली, जिला हरदोई), दयाराम उर्फ नन्हे निवासी सैदपुर कुर्मियान, फरहद खां उर्फ गुड्डू निवासी परतापुर जीवनसहाय, सरफुद्दीन निवासी चकमहमूद, मोहम्मद रजा उर्फ लल्ला गद्दी निवासी कांकरटोला चक महमूद, फुरकान नवी खान निवासी रामनगर कॉलोनी रोड नंबर एक, राशिद अली निवासी परौरा मीरगंज, मोहम्मद आरिफ निवासी फीलखाना पीलीभीत और आतिन जफर निवासी खुल्दाबाद प्रयागराज।