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भगवान श्रीराम के बाल रूप को अशोक सिंघल ने बनाया था पक्षकार

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प्रयागराज। विश्व हिन्दू परिषद के अंतरर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष रहे अशोक सिंहल ने जन्मभूमि मामले में रामलला के बाल रूप को पक्षकार बनाया था। यह निर्णय न्यायमूर्ति देवकी नंदन अग्रवाल की सलाह पर लिया गया था। पेशबंदी की यह रणनीति अकाट्य और सर्वमान्य बनी।
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अशोक सिंघल के सहयोगी रहे और विहिप के प्रांत उपाध्यक्ष विमल प्रकाश श्रीवास्तव बताते हैं कि पक्षकार बनाए जाने से रामलाल विजयतेतराम... हैं। कार्याध्यक्ष सिंघल की स्मृतियों को संजोते हुए बताया कि वर्ष 81-82 की है। वह सिंघल जी के साथ अयोध्या गए थे। वहां जन्म स्थान पर जूते पहनकर बैठे सुरक्षा कर्मियों और वहां फैले उनके भीगे कपड़े देख वह दुखी हो गए। वहीं उन्होंने राम मंदिर बनाने की प्रतिज्ञा ली और वर्ष 1984 में मंदिर निर्माण का संकल्प लिया।
विमल प्रकाश बताते हैं कि सरयू नदी के किनारे लिया गया राम मंदिर निर्माण का संकल्प अब पूरा होने के करीब है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को स्वीकार्य और जनभावनाओं के अनुरूप बताया। वह बोले यही सोच अशोक सिंघल, ठाकुर गुरुजन सिंह, देवकी नंदन अग्रवाल की भी थी। मामला अदालत में उलझा तो देश के कई सेवानिवृत्त न्यायमूर्तियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने राम लला की लड़ाई में उन्हें ही पक्षकार बनाया। इसकी अर्जी तत्कालीन सिविल जज सीनियर डिविजन राधेश्याम गुप्ता की अदालत में दी गई।
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उस समय सिविल सूट की पोषणीयता पर सुनवाई चल रही थी। पक्षकारों को सुनने के बाद सिविल जज ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया। बाद में अपने विस्तृत आदेश में रामलला को पक्षकार बनाने की अर्जी स्वीकार कर ली और इस प्रकार से रामलला इस अहम मुकदमे के पक्षकार बने।सिविल जज राधेश्याम गुप्ता के पुत्र और हाईकोर्ट के अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता बताते हैं कि उस समय पिता जी मुकदमे को लेकर अक्सर चर्चा करते थे। गत 30 अगस्त 2019 को उनका स्वर्गवास हो गया।
00 कीडगंज में विहिप कार्यालय था केंद्र बिंदु
कीडगंज का विहिप कार्यालय या महावीर भवन का मंदिर प्रांगण, दोनों ही स्थानों पर राम मंदिर निर्माण की परिकल्पना और रणनीति बनती रही हैं। वर्ष 1998 में सुरक्षा कारणों से महावीर भवन में ही दिग्गजों का जमावड़ा होने लगा। विजय राजे सिंधिया, उमा भारती, प्रवीण तोगड़िया की सिंघल के साथ बैठकें तीन महीने में एक बार जरूर होतीं। नवरात्र की नवमी तिथि पर तो राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोग महावीर भवन स्थित मंदिर के अहाते में जरूर बैठते।
एक विज्ञप्ति पर बंद हो गया था प्रदेश
विहिप के प्रांत उपाध्यक्ष विमल प्रकाश बताते हैं कि राम मंदिर संगठन का ही नहीं हिंदू जनभावनाओं और आस्था से जुड़ा विषय है। जन्म भूमि परिसर का ताला खुलने से पहले की एक घटना याद करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान राम की श्रद्धा की बात पर विहिप ने प्रदेश में बंदी का एलान किया। उन्होंने इसका समाचार जारी किया। दूसरे दिन प्रदेश भर में अभूतपूर्व बंदी रही।
विजय महामंत्र, राम नाम जप की रही निरंतरता
राम मंदिर आंदोलन के दौरान विहिप ने न केवल समय-समय पर घंटा-घड़ियाल बजवाए बल्कि शहर के साथ गांव-गांव में टोलियां गठित कर विजय महामंत्र का जप कराया। साथ में श्रीराम जय राम, जय जय राम मंत्र का जप निरंतर कराया।
बहुत याद आए परमहंस, सिंघल
प्रयागराज। राम जन्मभूमि मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद विहिप के पुरनिए कार्यकर्ताओं को अशोक सिंघल ही नहीं रामचंद्र परमहंस, ठाकुर गुरुजन सिंह बहुत याद आए। विहिप कार्याध्यक्ष रहे अशोक सिंघल के बेहद करीबी रहे विमल प्रकाश, मिथिलेश पांडेय, विवेक पांडेय, मनोज श्रीवास्तव को यह मलाल रहा कि मंदिर निर्माण का संकल्प दिलाने वाले सिंघल आज उनके साथ नहीं हैं।
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