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High Court : आपराधिक इतिहास के आधार पर अशोक प्रधान की जमानत अर्जी खारिज, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका

Sun, 11 Jan 2026 02:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रंगदारी और धमकी के आरोपों में जेल में बंद अशोक प्रधान को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। कहा कि आरोपी के 42 अपराधों का लंबा इतिहास देखते हुए इस आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता कि जमानत पर रिहाई के बाद वह गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रंगदारी और धमकी के आरोपों में जेल में बंद अशोक प्रधान को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। कहा कि आरोपी के 42 अपराधों का लंबा इतिहास देखते हुए इस आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता कि जमानत पर रिहाई के बाद वह गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने दिया है। मामला हापुड़ के थाना सिंभावली से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर रंगदारी और धमकी के आरोपों मुकदमा दर्ज है। अभियोजन के अनुसार अशोक प्रधान पर अपने सह-आरोपी रिंकू के जरिये शिकायतकर्ता से रंगदारी मांगने और धमकी देने का आरोप है। एफआईआर के मुताबिक बिना पैसे दिए आरोपी के क्षेत्र में कोई कार्य नहीं कर सकता। इस आरोप की पुष्टि सुपरवाइजर कौशलेंद्र समेत गवाह संजय और अमित ने भी की है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची को झूठा फंसाया गया है। उसके खिलाफ कोई कॉल डिटेल नहीं है। आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। ट्रायल के दौरान प्रथम सूचना देने वाला गवाह पक्षद्रोही हो गया है, जिससे सजा की संभावना नहीं बचती।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि आरोपी के खिलाफ 42 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें छह हत्या और छह हत्या के प्रयास के मामले शामिल हैं। चार मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया है। याची ने सभी आपराधिक मामलों के जमानत आदेश भी संलग्न नहीं किए, जो हाईकोर्ट नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट ने माना कि आरोपी की रिहाई से गवाहों को धमकाने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की पूरी संभावना है। हालांकि, कोर्ट ने यह छूट दी कि यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो ट्रायल कोर्ट में दोबारा जमानत अर्जी दी जा सकती है। साथ ही ट्रायल कोर्ट को मुकदमा शीघ्र निपटाने के निर्देश दिया है। 

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