असली अक्षयवट को लेकर जारी तमाम अफवाहों और अटकलों पर विराम लगाते हुए सेना ने पातालपुरी मंदिर स्थित अक्षयवट के लिए ही असली होने का दावा किया है। सोमवार को सेना की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि अक्षयवट को मुक्त कराए जाने सहित दर्शन पूजन की मांग को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं, जबकि असलियत ये है कि अक्षयवट के दर्शन पूजन पर कोई रोक है ही नहीं। किला परिसर स्थित पातालपुरी मंदिर में विराजमान अक्षयवट का प्रतिदिन दर्शन पूजन करने के लिए हजारों श्रद्धालु आते हैं।
सेना का यह भी दावा किया कि किले के दक्षिण में स्थित जिस अक्षयवट की बात की जा रही है, उसका ‘अक्षयवट’ के रूप में न तो कोई पुरातात्विक प्रमाण है और न ही इस बारे में कोई ऐतिहासिक अभिलेख ही उपलब्ध है। वस्तुत: किले के दक्षिण में स्थित ‘अक्षयवट’सामान्य बरगद का वृक्ष है। इस स्थान को दिगंबर जैन तीर्थंकरों के पदचिन्हों के स्थल के रूप में माना जाता है। जिसका पातालपुरी मंदिर स्थित वास्तविक ‘अक्षयवट’ से कोई सहसंबंध नहीं है। ऐसे में अक्षयवट के किले में कैद होने की बातें न सिर्फ भ्रामक हैं बल्कि सनातन धर्म की आस्था के साथ खिलवाड़ भी है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता एवं विंग कमांडर अरविंद सिन्हा का कहना है कि यहां पातालपुरी स्थित अक्षयवट मंदिर आम लोगों के लिए नियमित रूप से खुलता है।
श्री अक्षयवट सेवा न्यास के प्रबंधक एक महंत रवींद्र नाथ योगेश्वर (जोगी) के मुताबिक ‘अक्षय’ का शब्दिक अर्थ होता है जिसका कभी नाश न हो। ‘वट’ का शब्दिक अर्थ है बरगद का पेड़। किला स्थित अक्षयवट इसी श्रेणी में आता है। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु इस वृक्ष की श्रेष्ठता को स्वीकार करते हैं और अपनी उपस्थिति इसी वृक्ष में बिताते हैं। श्री पद्मपुराण के श्री प्रयाग माहात्म्य के अध्याय 72 के श्लोक नंबर 16 में भी इसका वर्णन है।
प्रयागराज में वर्ष 2013 में लगे कुंभ मेले के दौरान 15 जनवरी को आर्मी डे के मौके पर सेना ने संगमनगरी के लोगों को तोहफा दिया था। तब यहां तैनात रहे सब एरिया कमांडर मेजर जनरल विशंभर दयाल ने कहा था हिंदू धर्म के करोड़ों लोगों की आस्था को देखते हुए अक्षयवट और पातालपुरी को हमेशा खोलने के लिए सेना ने सहमति दे दी है। इस दौरान सेना ने खास तौर पर श्रद्धालुओं के लिए इसे रिनोवेट किया गया था। तब से लगातार पातालपुरी मंदिर स्थित अक्षयवट नियमित रूप से श्रद्धालुओं के लिए खोला जा रहा है। इस बीच 22 अगस्त 2018 को आर्मी प्रमुख विपिन रावत के साथ किला का निरीक्षण करने आई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने श्री अक्षयवट सेवा न्यास के पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्होंने मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार की बात कही थी। मंदिर के महंत रविंद नाथ और मुकेश नाथ के मुताबिक अक्षयवट मंदिर परिसर में रक्षा मंत्री के जाने के बाद अभी स्टील की ग्रिल और कोटा स्टोन लगाने का ही काम हुआ हे। लाइटिंग, ग्रेनाइट और पेयजल के लिए आरओ लगाने का काम अब तक नहीं किया गया है।