आंसर-की का रेट प्रति सेट दो लाख रुपये
0 गिरोह के पकड़े गए सदस्यों से पूछताछ में कई अन्य अहम जानकारियां भी मिलीं।
0 सरगना विजयकांत ने बताया कि आंसर-की उपलब्ध कराने के लिए कौशाम्बी स्थित कॉलेज का लेक्चरर और किशनलाल मोटी रकम वसूलते थे।
0 वह आंसर-की के हर सेट के दो लाख रुपये वसूलते थे।
0 इसमें प्रश्नपत्र आउट कराकर इसे सॉल्व कराने का भी खर्चा शामिल है।
0 केंद्र प्रबंधन से सांठगांठ कर वह परीक्षा शुरू होेने के कुछ देर बाद ही प्रश्नपत्र मंगा लेते थे।
0 इसके बाद सॉल्वर से इसे सॉल्व कराकर प्रश्नपत्र सेट के आधार पर अलग-अलग आंसर-की तैयार करते।
0 फिर यही आंसर-की नकल माफिया गिरोह को भेजी जाती।
ए, सी व जी सेट की आंसर-की मिली मोबाइल में
कौशाम्बी के लेक्चरर व किशनलाल ने सरगना विजयकांत को तीन सेट के प्रश्नपत्र की आंसर-की उपलब्ध कराई थी। इनमें ए, सी व जी सेट की आंसर की शामिल है। पकड़े जाने के दौरान जब विजयकांत के व्हाट्सएप अकाउंट को चेक किया गया तो चैट में आंसर-की मिली।
मोबाइल से डिलीट कर दिए थे प्रवेश पत्र
सूत्रों का कहना है कि पकड़े जाने के दौरान तलाशी व जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि सरगना विजयकांत के मोबाइल में ढेरों परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र व जीडीएस परीक्षा से संबंधित प्रपत्रों की भी सॉफ्ट कॉपी मौजूद थी। हालांकि उसने बचने के लिए इन्हें डिलीट कर दिया था। लेकिन जब एसटीएफ ने मोबाइल में रिसेंटली डिलीटेड फोल्डर चेक किया तो प्रवेश पत्र व अन्य प्रपत्र मिल गए।
दिल्ली से मंगाया था ईयर बड, ब्लूटूथ डिवाइस
सॉल्वर गिरोह के सदस्यों ने बताया कि बरामद ब्लूटूथ डिवाइस व ईयर बड दिल्ली से मंगाए गए थे। यह काम प्रशांत नाम का युवक करता है। वह इससे पहले भी गिरोह को उपकरणों की सप्लाई कर चुका था। लेखपाल परीक्षा के लिए भी उसने कुछ दिन पहले ही उपकरण मंगाए थे।
नहीं दिखा पाए कागजात, कार सीज
एसटीएफ अफसरों ने बताया कि सरगना व उसके अन्य दोनों साथी एक ब्रेजा कार में बैठकर वाराणसी, कानपुर में बैठे परीक्षार्थियों को पेपर सॉल्व करा रहे थे। पूछने पर विजयकांत ने इस कार को अपना बताया। हालांकि मांगने पर वह दस्तावेज नहीं दिखा पाया। इस पर कार को कब्जे में लेकर थाने लाया गया जहां इसे एमवी एक्ट में सीज कर दिया गया।