उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराए जाने के आदेश के बाद आयोग परिसर में पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव का अचानक आना-जाना शुरू हो गया है। यह आरोप प्रतियोगी छात्रों ने लगाए हैं और इस बाबत मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत भेजकर सीबीआई जांच शुरू होने तक निगरानी के लिए यूपीपीएससी में आरक्षी नियुक्त किए जाने की मांग की है। प्रतियोगियों का आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष डॉ. अनिरुद्ध यादव भी पूर्व अध्यक्ष से मिले हुए हैं, सो आयोग की आगामी परीक्षाओं से उन्हें अलग किया जाए।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ओर से सीएम को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि सर्वाधिक विवादित रहे आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के अब भी आयोग परिसर में प्रवेश की सूचना मिल रही है जबकि सामान्य जन का लोक सेवा आयोग परिसर में प्रवेश वर्जित है। अगर विशेष परिस्थितियों में सामान्य जन को प्रवेश दिया जाना है तो इसके लिए आयोग की ओर से पास जारी किया जाता है। पत्र के जरिये यह आरोप भी लगाया गया है कि आयोग के सदस्य डॉ. सुनील कुमार जैन, सैयद फरमान अली, मेजर संजय यादव के आवास पर भी कुछ सफल छात्रों के आने-जाने की सूचना मिल रही है। इन सभी का आवास लोक सेवा आयोग परिसर में है। पत्र के जरिये समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने आयोग के मौजूदा अध्यक्ष डॉ. अनुरुद्ध यादव पर भी निशाना साधा है।
आरोप लगाया है कि उन्होंने भी पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा के केंद्र आवंटन में पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव की तरह मनमानी की है। मांग की है कि उन्हें आयोग की आगामी परीक्षाओं से अलग किया जाए। उन्हीं के कार्यकाल में एक बड़ी परीक्षा का पेपर आउट हुआ। मामले की लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज है लेकिन आयोग अध्यक्ष ने अपने स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की और न ही इसकी जांच कराई। सीएम को भेजे गए पत्र में मौजूदा अध्यक्ष एवं कुछ सदस्यों की कार्य प्रणाली और पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के बार-बार आयोग में आने के कारण सुबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है। प्रतियोगियों का आरोप है कि इससे सीबीआई जांच प्रभावित हो सकती है।