प्रयागराज। आस्ट्रेलिया में छह महीने बीस दिन गुजारने के बाद योगगुरु स्वामी आनंद गिरि सोमवार को मठ बाघंबरी गद्दी पहुंचे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की छवि बिगाड़ने के लिए कुछ लोगों ने साजिश रचकर मुझे फंसाने की पुरजोर कोशिश की थी, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हुए। मठ में प्रवेश करते ही आनंद गिरि ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से जब आशीर्वाद लिया तो दोनों ही अत्यंत भावुक हो उठे।
उल्लेखनीय है कि स्वामी आनंद गिरि प्रयागराज से वह 31 मार्च को सिडनी के लिए रवाना हुए थे। वहां महिलाओं से अमर्यादित आचरण के आरोप में उन्हें गिरफ्तार होना पड़ा, बाद में आरोप निराधार पाए जाने पर कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। सोमवार को मठ पहुंचते ही स्वामी आनंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि के पांव छुए और उनकी कुर्सी के निकट ही जमीन पर बैठ गए। बाद में ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने अपना कल और आज बेबाकी से बयां किया। बोले, गुरुदेव भगवान ने ही मुझे शिक्षा-दीक्षा दी। उनके निर्देश पर ही मुझे सनातन धर्म की सेवा का दायित्व मिला। कुछ षड़यंत्रकारियों ने ऐसी साजिश रची ताकि मेरी, मेरे गुरुदेव, संत समाज और सनातन धर्म की छवि धूमिल हो। लेकिन, इसमें वे पूरी तरह से विफल हुए। सिडनी की कोर्ट ने पूरे विषय को निराधार मानते हुए खारिज किया और मुझे ससम्मान बरी किया।
मैं इस बात से बहुत क्षुब्ध और आहत हूं कि मेरी वजह से मेरे गुरु को कष्ट हुआ। हनुमान जी और गुरुदेव की कृपा रही कि मैं अपने लोगों के बीच फिर आ सका हूं। जहां तक आज के कार्यक्रम की बात है तो न मैंने किसी से कहा था, न ही किसी को बुलाया था, बस वे लोग ही आए जो मुझसे स्नेह और मेरा सम्मान करते हैं।
कालिंदीपुरम, कचहरी पर स्वागत
स्वामी आनंद गिरि शनिवार की सुबह सिडनी से चलकर मलयेशिया और अगले दिन रविवार को नई दिल्ली पहुंचे, जहां गोकुल आश्रम में रात्रि विश्राम किया। सोमवार को वह एयर इंडिया की फ्लाइट से नई दिल्ली से प्रयागराज एयरपोर्ट पहुंचे। यहां विधायक संजय गुप्ता, हर्षवर्धन वाजपेयी, महानगर अध्यक्ष अवधेश गुप्ता, प्रवीण पटेल आदि ने उनका स्वागत किया। कालिंदीपुरम में पूनम संत के नेतृत्व में महिलाओं और फिर कचहरी पर अधिवक्ताओं ने उनका अभिनंदन किया। यहां से वह सीधे मठ बांघबरी गद्दी पहुंचे।