अवैध रूप से चल रहीं सैकड़ों एंबुलेंस
शहर में सैकड़ों एंबुलेंस अवैध रूप से मरीजों को ढो रही हैं। इन एंबुलेंस का आरटीओ कार्यालय में पंजीकरण ही नहीं है। इनका जमावड़ा सबसे ज्यादा एसआरएन परिसर में देखने को मिलता है। अस्पताल के अधिकतर स्टाफ से इनके संचालकों की साठगांठ होती है। हर एक मरीज पर कमीशन तय होता है। एंबुलेंस की स्थिति क्या है, इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
सुविधाओं का टोटा
कई सरकारी एंबुलेंस में आम सुविधाओं का भी टोटा है। इनमें ऑक्सीजन सिलेंडर की सही व्यवस्था नहीं है। प्राथमिक उपचार के लिए दवाईयां भी पूरी तरह से मौजूद नहीं हैं। वहीं, एंबुलेंस की जिस सीट पर मरीज को लिटाया जाता है वह पूरी तरह से उधड़ चुकी है। फिर भी बिना रोक टोक यह मरीजों को ढो रही हैं।
जिन एंबुलेंस की फिटनेस समाप्त हो चुकी है, उन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है, इसके अलावा अवैध रूप से चल रही एंबुलेंस की धरपकड़ के लिए प्रवर्तन टीमों का गठन कर दिया है। मंगलवार को किन्हीं कारणों से अभियान की शुरुआत नहीं हो सकी। बुधवार से इसकी शुरुआत होगी। - अलका शुक्ला, एआरटीओ (प्रवर्तन)