नवजात के लिए गोल्डन मिनट महत्वपूर्ण
एसआरएन अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. नीलम सिंह ने कहा कि जन्म के बाद के पहले कुछ मिनट, जिन्हें गोल्डन मिनट्स कहा जाता है, नवजात के जीवन और भविष्य के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस अवधि में सही समय पर उचित चिकित्सकीय सहायता मिल जाए तो अनेक नवजातों का जीवन बचाया जा सकता है।
मुख्य अतिथि प्रो. राजीव शरण ने कहा कि नवजात पुनर्जीवन (रेससिटेशन) एक ऐसा कौशल है, जिसमें नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। वहीं बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष मौर्य ने बताया कि कार्यक्रम में कुल 36 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
बेहतर प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक छह प्रशिक्षुओं पर एक फैसिलिटेटर नियुक्त किया गया था। प्रतिभागियों को बैग-मास्क वेंटिलेशन, श्वास सहायता, नवजात कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन व अन्य जीवनरक्षक तकनीकों का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में लखनऊ एसजीपीजीआई की डॉ. अनीता सिंह, लखनऊ के डॉ. सचिन वर्मा, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. राहुल जायसवाल व बिजनौर की डॉ. इप्शिता ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।