Prayagraj News : मठ बाघंबरी गद्दी।
- फोटो : प्रयागराज
पता चला है कि महंत की मौत के मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद नैनी सेंट्रल जेल में बंद आनंद गिरि से अमर गिरि की नजदीकियों की वजह से बलवीर गिरि ने उनसे दूरी बना ली और मठ से हटा दिया है। पता चला है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में अमर गिरि ने हाल में ही पांच पेज का हलफनामा पेश करते हुए कहा है कि आनंद गिरि के खिलाफ उन्होंने लिखित तहरीर नहीं दी थी।
अलबत्ता उन्होंने पवन महाराज के साथ जार्जटाउन थाने में जाकर सिर्फ महंत की मौत होने की मौखिक सूचना दी थी। अमर गिरि के इस हलफनामे के बाद केस कमजोर होने की बात कही जाने लगी है। साथ ही बलवीर गिरि के विरोधी आनंद गिरि पर लगे आरोपों की हवा निकलने के भी कयास लगाए जाने लगे हैं।
Prayagraj News : स्वामी अमर गिरि।
- फोटो : अमर उजाला।
अमर गिरि को सताने लगा सुरक्षा का खतरा, फोन बंद
मठ से निष्कासन के बाद अमर गिरि और पवन महाराज को सुरक्षा का खतरा सताने लगा है। कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने के बाद अमर गिरि पर दबाव पड़ने और धमकियां मिलने की भी बात सामने आ रही है। इसके बाद अमर गिरि ने अपना मोबाइल बंद कर लिया है।
Prayagraj News : महंत बलवीर गिरि।
- फोटो : प्रयागराज
महंत बलवीर गिरि अचानक हरिद्वार रवाना
बाघंबरी मठ में अंदरूनी खींचतान तेज होने के बाद महंत बलवीर गिरि हरिद्वार चले गए हैं। मठ के भीतर इस घटनाक्रम को लेकर कोई कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। पुजारी से लेकर सेवादार तक के होठ सिले हुए हैं। बलबीर गिरि ने अमर उजाला को बताया कि वह जरूरी काम से हरिद्वार आ गए हैं। जल्द ही मठ पहुंचकर इस मसले पर बात करेंगे।
अमर गिरि को बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापन समेत अन्य सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है। इधर उनकी गतिविधियां ठीक नहीं चल रही थीं। मठ और मंदिर के हित में काम न करने की उनकी कई शिकायतें मिलने पर उनको निष्कासित किया गया है। - महंत बलवीर गिरि, बाघंबरी गद्दी मठ और बड़े हनुमान मंदिर।
Prayagraj News : महंत नरेंद्र गिरि। फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला।
स्वामी अमर गिरि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के भरोसेमंदों में गिने जाते रहे हैं। अमर गिरि की निष्ठा और समर्पण की वजह से ही उनको आनंद गिरि की जगह हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक की जिम्मेदारी दी गई थी। महंत नरेंद्र गिरि की मौत के दिन भी सबसे पहले बड़े हनुमान मंदिर से स्वामी अमर गिरि को ही बुलाया गया था। अमर गिरि ही सबसे पहले मठ के उस आगंतुक कक्ष में घुसे थे, जिसमें महंत नरेंद्र गिरि का फंदे से लटकता हुआ शव देखा गया था।