पुराछात्र सम्मेलन में नाचते चिकित्सक।
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डॉ. आलोक मिश्रा व डॉ. कमल सिंह को वेलफेयर एसोसिएशन में बहुमूल्य योगदान करने के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा मेडिसिन विभाग में टॉप करने वाली छात्रा डॉ. ईशा गुप्ता को डॉ. मुक्ती भटनागर गोल्डेन अवार्ड से सम्मानित किया गया। गोल्डेन बैच के पांच व सिल्वर के तीन चिकित्सक यूके, यूएस व बहरीन से कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। इस दौरान गोल्डेन बैच के मृतक चिकित्सकों का दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में सचिव डॉ. अनुज गुप्ता, अध्यक्ष डॉ. हरिश श्रीवास्तव, संरक्षक डॉ. एसपी सिंह, पूर्व प्रोफेसर डॉ. डीके अग्रवाल, डॉ. भूपेश द्धिवेदी सहित अन्य मौजूद रहे।
गोल्डेन बैच
40 वर्षों के बाद यहां आया हूं। मेरे पास तो शब्द ही नहीं है। ऐसा लगता है कि इस एक दिन में सारी यादें ताजा कर लूं। अपने पुराने दास्तों से मिलकर बहुत अच्छा लगा। - डॉ. भरत राज श्रेष्ठ, यूके
एक दिन मेडिसिन विभाग की क्लास के दौरान मैंने अपने टीचर की सोच से अलग अपने विचार रख दिए। जिसके बाद मुझे समझाया गया कि अगर गुरू कुछ बोले तो उसे सुनना भी जरूरी होता है। क्योंकि उसमें हमारा हमेशा हित होता है। उन शब्दों ने मेरी जिंदगी बदल दी। - डॉ. दिनेश चंद्र नौटियाल, देहरादून
सिल्वर बैच
भईया मुझे तो सिंगापुर से छुट्टी ही नहीं मिल रही थी। मगर मैंने साफ कह दिया कि मैं तो अपने दोस्तों से मिलने के लिए जरूर जाऊंगा, बाकी आप अपना देख लो। कुछ दोस्त यहां नहीं मिले, वापसी में मैं दिल्ली उनके घर जरूर मिलने जाऊंगा। मैं और मेरी पत्नी डॉ. निधी मिश्रा एक ही बैच से हैं और हम दोनों नौकरी दांव पर रखकर आए हैं। - डॉ. नीरज मिश्रा, सिंगापुर
मुझे तो आज भी सीनियर की रैगिंग याद है, जब उन्होंने मुझसे सीनियर बैच की मैडम को प्रपोज करने के लिए कहा था। मैं डरता हुआ, प्रपोज करने पहुंचा। हालांकि थोड़ी बहुत डांट पड़ी, सीनियर के अगले टास्क से बच गया। - डॉ. सुनील शर्मा, बनारस