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पुराछात्र सम्मेलन : चिकित्सकों ने मचाया धमाल, भांगड़े की धुन पर झूमे, बाराती बनकर मिले पुराने दोस्तों से

Mon, 25 Dec 2023 03:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

38 वें गोल्डेन बैच के 50 वर्ष पुराने चिकित्सक जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना... गीत पर जमकर झूमे। वहीं, 13 वें बैच यानि 25 वर्ष पुराने चिकित्सक भांगड़े की धुन पर जमकर नाचे।
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पुराछात्र सम्मेलन में नाचते चिकित्सक। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मिलन 2023 एल्युमिनाई वेलफेयर एसोसिएशन के कार्यक्रम में एक-दूसरे से मिलते ही पुराने दोस्तों के चेहरे खिल उठे। इसके बाद चिकित्सकों ने उम्र और तकलीफों को भुलाकर जमके धमाल मचाया। 38 वें गोल्डेन बैच के 50 वर्ष पुराने चिकित्सक जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना... गीत पर जमकर झूमे। वहीं, 13 वें बैच यानि 25 वर्ष पुराने चिकित्सक भांगड़े की धुन पर जमकर नाचे।

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ऊंट व बग्घी पर सवार होकर सिल्वर बैच के चिकित्सक कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। जिसे देखकर लग रहा था कि मानो बारात आ गई हो। इस दौरान गोल्डेन बैच के डॉ. बीबी अग्रवाल ने चुटकी लेते हुए कहा कि भईया बारात तो दो ही लोगों की आती है, फूफा की या दामाद की...।मिलन 2023 में शामिल होने पहुंचे कुछ चिकित्सकों की आंखाें में खुशी के आंसू थे, तो कुछ के चेहरे पर मौज-मस्ती। इस एक दिन में पुरा छात्र अपने हर एक पुराने लम्हो को संजोना चाहते थे, मगर उन्हें समझ में नहीं आ रहा था, कि वह आखिर शुरू कहां से करें।

कार्यक्रम में रजत के 70 व गोल्डेन बैच के 60 चिकित्सक शामिल होने पहुंचे। जिसमें गोल्डेन बैच में हड्डी रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एएन वर्मा, एनेस्थीसिया विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एमएन मिश्रा, पैथोलॉजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. पीए सिंह व मेडिसिन के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसके शुक्ला को लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार दिया गया।

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पुराछात्र सम्मेलन में नाचते चिकित्सक। - फोटो : अमर उजाला।

डॉ. आलोक मिश्रा व डॉ. कमल सिंह को वेलफेयर एसोसिएशन में बहुमूल्य योगदान करने के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा मेडिसिन विभाग में टॉप करने वाली छात्रा डॉ. ईशा गुप्ता को डॉ. मुक्ती भटनागर गोल्डेन अवार्ड से सम्मानित किया गया। गोल्डेन बैच के पांच व सिल्वर के तीन चिकित्सक यूके, यूएस व बहरीन से कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। इस दौरान गोल्डेन बैच के मृतक चिकित्सकों का दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में सचिव डॉ. अनुज गुप्ता, अध्यक्ष डॉ. हरिश श्रीवास्तव, संरक्षक डॉ. एसपी सिंह, पूर्व प्रोफेसर डॉ. डीके अग्रवाल, डॉ. भूपेश द्धिवेदी सहित अन्य मौजूद रहे।











 

गोल्डेन बैच

40 वर्षों के बाद यहां आया हूं। मेरे पास तो शब्द ही नहीं है। ऐसा लगता है कि इस एक दिन में सारी यादें ताजा कर लूं। अपने पुराने दास्तों से मिलकर बहुत अच्छा लगा। - डॉ. भरत राज श्रेष्ठ, यूके

एक दिन मेडिसिन विभाग की क्लास के दौरान मैंने अपने टीचर की सोच से अलग अपने विचार रख दिए। जिसके बाद मुझे समझाया गया कि अगर गुरू कुछ बोले तो उसे सुनना भी जरूरी होता है। क्योंकि उसमें हमारा हमेशा हित होता है। उन शब्दों ने मेरी जिंदगी बदल दी। - डॉ. दिनेश चंद्र नौटियाल, देहरादून

सिल्वर बैच

भईया मुझे तो सिंगापुर से छुट्टी ही नहीं मिल रही थी। मगर मैंने साफ कह दिया कि मैं तो अपने दोस्तों से मिलने के लिए जरूर जाऊंगा, बाकी आप अपना देख लो। कुछ दोस्त यहां नहीं मिले, वापसी में मैं दिल्ली उनके घर जरूर मिलने जाऊंगा। मैं और मेरी पत्नी डॉ. निधी मिश्रा एक ही बैच से हैं और हम दोनों नौकरी दांव पर रखकर आए हैं। - डॉ. नीरज मिश्रा, सिंगापुर

मुझे तो आज भी सीनियर की रैगिंग याद है, जब उन्होंने मुझसे सीनियर बैच की मैडम को प्रपोज करने के लिए कहा था। मैं डरता हुआ, प्रपोज करने पहुंचा। हालांकि थोड़ी बहुत डांट पड़ी, सीनियर के अगले टास्क से बच गया। - डॉ. सुनील शर्मा, बनारस

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