Allhabad highcourt verdict on PIL
न्याय के लिए स्वच्छ हृदय से आएं वादकारी
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाकर अदालत को गुमराह करने की कोशिश में दाखिल याचिका हर्जाने के साथ खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि न्याय की आस लेकर आने वाले वादकारियों को स्वच्छ हृदय से अदालत आना चाहिए। यदि तथ्य छुपाकर या तोड़ मरोड़ कर पेश करने पर अदालत ऐसे मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर सकती है।
यह आदेश न्यायमूर्ति बीके नारायण तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने बलिया के नृपेन्द्र कुमार दौसिया की याचिका पर दिया है। याचिका में बलिया के सोहन ब्लॉक के चितबड़ा गांव में किसान सेवा केंद्र विलेज रिटेल आउटलेट डीलरशिप देने में घपले की जांच करने तथा नीलामी पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याची का कहना था कि उसने 30 मार्च 2017 को उसकी शिकायत की है । जबकि उसने ऐसी कोई शिकायत 30 मार्च को नहीं की। याची ने अपने हलफनामे में ही स्वीकार किया है कि उसने पहली बार 27 अप्रैल 2017 को शिकायत की है।
कोर्ट ने कहा याची ने कोर्ट के समक्ष सही तथ्य पेश नहीं किया। ऐसे में समय के भीतर प्रत्यावेदन दाखिल होने के बावजूद उसे कोर्ट से कोई राहत नहीं दी जा सकती । कोर्ट ने कहा कि याचिका दाखिल करते समय पक्षकार का यह दायित्व है कि वह संपूर्ण तथ्यों के साथ कोर्ट में आए और यदि ऐसा नहीं करता तो कोर्ट याचिका की सुनवाई करने से इंकार कर सकती है । कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।